बेतिया/पश्चिमी चंपारण। चार लेबर कोड के विरोध में ट्रेड यूनियन सेंटर ऑफ इंडिया (टीयूसीआई) की जिला कमिटी के नेतृत्व में बेतिया में विरोध जुलूस निकाला गया। जुलूस शहीद स्मारक से शुरू होकर समाहरणालय गेट तक पहुंचा, जहां सभा आयोजित की गई। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने श्रम संहिताओं को काला कानून बताते हुए उनकी प्रतियां जलाकर विरोध दर्ज कराया।

सभा को संबोधित करते हुए टीयूसीआई के केंद्रीय कमिटी सदस्य सह भाकपा (माले) रेड फ्लैग के राज्य सचिव कॉमरेड रवीन्द्र कुमार ‘रवि’ ने कहा कि श्रम संहिताओं से सभी श्रमिकों को
न्यूनतम वेतन और सामाजिक सुरक्षा मिलने का दावा बेबुनियाद है। उन्होंने कहा कि असंगठित क्षेत्र के अधिकांश मजदूर इन प्रावधानों के दायरे से बाहर हैं और नए प्रावधानों से संगठित क्षेत्र के कई श्रमिक भी कानूनी सुरक्षा से वंचित हो रहे हैं।
उन्होंने इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड का उल्लेख करते हुए कहा कि 300 से कम श्रमिकों वाले प्रतिष्ठानों को छंटनी और बंदी के लिए सरकारी अनुमति से छूट दी गई है, जबकि पहले यह सीमा 100 थी। साथ ही छोटे उद्योगों को सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थितियों से जुड़े कई प्रावधानों से बाहर रखा गया है।
टीयूसीआई नेताओं ने वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण (ASI) 2021–22 के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 100 से कम श्रमिकों वाले कारखाने कुल कारखानों का बड़ा हिस्सा हैं, जिससे बड़ी संख्या में मजदूर सुरक्षा दायरे से बाहर हो जाएंगे। उन्होंने ₹26,000 मासिक न्यूनतम वेतन की मांग दोहराई और सरकार से स्पष्ट न्यूनतम वेतन व उसके प्रवर्तन की स्थिति सार्वजनिक करने को कहा।
जिला संयोजक हरिशंकर प्रसाद ने कहा कि 8 घंटे के कार्यदिवस की व्यवस्था को कमजोर कर 12 घंटे तक काम को वैध बनाने की कोशिश संविधान के अनुच्छेद 42 की भावना के खिलाफ है। पूर्व निगम पार्षद रीता रवि ने कहा कि श्रम संहिताएं स्थायी रोजगार और सेवानिवृत्ति लाभों को कमजोर करती हैं तथा इन्हें रद्द किया जाना चाहिए।
सभा को अवधेश राम, रसूल मियां, राजू राम, भगेलू राम, महंथ राम, चंदा देवी सहित अन्य नेताओं ने भी संबोधित किया।