आगरा। आगरा जनपद के कलक्ट्रेट जिलाधिकारी कार्यालय पर काष्ठ उद्योग समिति के द्वारा सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता से पैरवी कराने हेतु राष्ट्रपति,प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपकर मांग की है।आपको बता दें कि काष्ठ उद्योग समिति ने उत्तर प्रदेश वन विभाग द्वारा जारी वर्ष 2018 में लाइसेंस जिसमें नए काष्ठ आधारित उद्योग आरा मिल, विनियर प्लाईवुड, में उत्तर प्रदेश सरकार के मिशन औद्योगिक विकास की गति में बाधा उत्पन्न करने वाले अराजक तत्वों के खिलाफ उच्च स्तरीय जांच करा कर कानूनी ढंग से दंडात्मक कार्रवाई करने हेतु एवं जारी लाइसेंस बाधाओं का निस्तारण, उदय फाउंडेशन एवं एजुकेशन ट्रस्ट मुजफ्फरनगर की जांच करा कर दंडात्मक कार्रवाई हेतु माननीय सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता हरीश साल्वे से ही पैरवी कराने हेतु महामहिम राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन आगरा जिला अधिकारी को देकर न्याय की मांग की है।
बताते चलें कि ज्ञापन के माध्यम से उद्योग कल्याण समिति ने राष्ट्रपति , प्रधानमंत्री , मुख्यमंत्री का ध्यान उसी लॉटरी की ओर आकर्षित किया है जिसमें 1250 लाइसेंस विगत वर्षों में जारी किए गए थे। साथ ही यह लाइसेंस धारियों द्वारा 5 वर्षों से 20 करोड़ रुपए शुल्क के रूप में जमा कर दिए थे। लेकिन आरोप है कि एक पुराने माफिया एवं एक तथाकथित आईएएस ऑफिसर ने कुछ ऐसा गोल मटोल किया कि आज इस कोरोना काल में उद्योग समिति को भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। इस भ्रष्टाचार में एक एनजीओ का बहुत बड़ा हाथ है। साथ ही उद्योग समिति ने इसे पैसा कमाने वाली मशीन की संज्ञा दी है।इनके असंगत नीतियों के कारण आज लगभग 2 लाख लोगों की रोजी-रोटी अधर में लटकी हुई है। दिए गए ज्ञापन में स्पष्ट रूप से सब कुछ लिखा गया है l
अब सवाल यह है कि आखिर उद्योग समिति सुप्रीम कोर्ट की एक विशेष वकील के द्वारा ही पैरवी करवाना चाहती है ऐसा क्यों ? दूसरा सवाल यह है यदि निष्पक्ष जांच होती है तो कितने छुपे हुए चेहरे सामने आएंगे ? या अन्य तमाम मामलों की तरह फाइलों में भ्रष्टाचार का मामला दब कर रह जाएगा। इस दौरान ज्ञापन देने वालों में सोनू कुमार, टिंकल,राम सहाय, अंकित शर्मा, कालीचरण, बलवीर, बिष्णु,आदि मौजूद रहे।