संवाददाता: मोहन सिंह
बेतिया/पश्चिमी चंपारण। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, सुप्रिया रोड स्थित संगम भवन में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बच्चों ने कृष्ण-सुदामा मिलन और राधे-कृष्ण के गोप-गोपियों संग नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। यह आयोजन शहर के गणमान्य नागरिकों, माताओं-बहनों और श्रद्धालुओं की उपस्थिति में हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ।

कार्यक्रम के दौरान ब्रह्माकुमारी अंजना दीदी ने उपस्थित सभा को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के आध्यात्मिक रहस्यों से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म रात्रि 12 बजे इसलिए होता है क्योंकि यह काल कलियुग और सतयुग के संगम का प्रतीक है। जब सृष्टि परिवर्तन के दौर से गुजरकर सतयुग में प्रवेश करती है तो श्रीकृष्ण विश्वमहाराजन राजकुमार के रूप में अवतरित होते हैं और पूरी धरती दिव्य गुणों से संपन्न हो जाती है।

उन्होंने यह भी बताया कि यदि हम श्रीकृष्ण के दिव्य गुणों और संस्कारों को अपने बच्चों में विकसित करें, तो वे भी समाज में आदर्श व्यक्तित्व बनकर एक नई दिशा देने में सक्षम होंगे।

कार्यक्रम के अंत में मारवाड़ी महिला समिति की अध्यक्षा रेनू पोद्दार ने श्रीकृष्ण और राधा का रूप धारण करने वाले बच्चों को प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार प्रदान किए। इसके साथ ही एडवोकेट वंदना झा, सीमा मधोगडिया, रेनू पोद्दार और ब्रह्माकुमारी अंजना दीदी ने सभी उपस्थित लोगों के साथ मिलकर भगवान श्रीकृष्ण की आरती की।