संवाददाता प्रताप सिंह आजाद
आगरा के लेडी लायल हॉस्पिटल ने मीनू दिवाकर नाम की महिला को लेवर पेन होने के कारण भर्ती किया ,लंबे समय तक उसके पति नवीन दिवाकर को गुमराह किया गया की सुबह तक बच्चा हो जायेगा । पर अचानक इलाज ना मिलने के अभाव मे पत्नी की हालत गंभीर हो गयी ,लेडी लायल ने पल्ला झाड़ते हुहे केस एस एन रेफर किया जहाँ डॉ ने प्रसूता के पति के साथ अबद्रता की गयी ।
आगरा योगी जी के इस खुशहाल प्रदेश मे आज भी स्वास्थ्य सेवाएं पर ताले लगे हुहे है! ताले कहने के पीछे का कारण है कि जब सरकार ने आम जन के लिए सरकारी हॉस्पिटल बनवा रखे है, तो फिर भी इलाज नहीं मिल पाता,,तो फिर ऐसी सेवाओ पर ताला लगा देना ही इक औपचारिक विकल्प है।
आगरा के लेडी लायल हॉस्पिटल और एस एन की लापरवाही के कारण आज मीनू और उसकी मासूम बच्ची मौत से लड़ाई लड़ रहे है।

बता दे की मामला नवीन दिवाकर ने अपनी पत्नी मीनू को 30 जुलाई की सांय तक़रीबन 3 बजे लेडी लायल हॉस्पिटल मे भर्ती कराया जहाँ डॉ ने पहले तो उसकी पत्नी को हॉस्पिटल के बहार ऐसे ही डाल रखा ।
जब पति नवीन ने अपने कुछ पत्रकार साथियों की सहायता से लेडी लायल हॉस्पिटल की प्रधान्याचार्या डॉ रेखा गुप्ता से कह सुनकर जैसे तैसे बेड का इंजाम कराया ,मीनू के पति नवीन दिवाकर हिंदी दैनिक पेपर यूथ इंडिया पेपर मे फोटो जर्नीलिस्ट का कार्य करते है!पत्नी को लंबे वक़्त तक हॉस्पिटल मे डॉ की तरफ से कोई भी इलाज नहीं दिया गया।
पति लगातार पूछता रहा की मेरी पत्नी को बच्चा कब होगा तो डॉ बोले सब है। सुबह तक हो जाएगा इसी भरोसे के कारण तक़रीबन रात 2:30 बजे प्रसूता की हालत अचानक बिगड़ गयी ,तो डॉ ने प्रसूता को एस एन रेफर कर दिया| पर एस एन के डॉ ने भर्ती करने की बजाये प्रसूता के पति नवीन के साथ अबद्रता करने लगे।
पति गिड़गिड़ाता रहा की मेरी पत्नी का इलाज शुरू कर दीजिये, उसकी हालत बहुत खराब है| पर डॉ बोले अभी इंतजार करो जब बेड मिलेगा तब भर्ती करेंगे जब नवीन ने अपने आपको मीडिया मे होने का हवाला दिया ,तो डॉ के तेवर और बदल गए, और प्रसूता के पति को और खरी खोटी सुनाने लगे की तुम किसी भी प्रेस मे हो जब बेड मिलेगा तब इलाज शुरू होगा, और अपने शब्दों की गरिमा भूलकर डॉ नवीन से बोले की पहले केस को खराब कर लाते हो ,और फिर यहाँ चले जाते हो नवीन जब देखा की उसकी पत्नी को यहाँ उपचार नहीं मिल पायेगा ,तो बिना किसी लापरवाही के वो अपनी पत्नी को प्राइवेट हॉस्पिटल ले गया ।
जहाँ उसने कैसे तैसे पैसे का इंतजाम करके अपनी पत्नी का इलाज चालू करवाया डॉ ने बिना वक़्त बिताये उसका ऑपरेशन किया जहाँ प्रसूता ने इक बच्ची को जन्म दिया ।

जहाँ इक तरफ उस छोटी सी बच्ची जन्म होने के तुरंत बाद मशीन मे रखा गया है ,तो वही प्रसूता की भी हालत गंभीर है! प्रसूता के पति नवीन का कहना है की अगर आम लोगो को जब प्राइवेट हॉस्पिटल मे जब इलाज कराना है ,तो फिर ऐसे सरकारी हॉस्पिटलो का क्या फायदा जहाँ इलाज के नाम पर इंसान की जिंदगी के साथ खिलवाड़ किया जाता है।