संवाददाता मोहन सिंह बेतिया
बिहार के सबसे बड़े कम्युनिस्ट नेताओं में से एक कॉमरेड रामदेव बर्मा के निधन से भाकपा माले मर्माहत है. उनके निधन से कम्युनिस्ट आंदोलन के संसदीय राजनीति का एक दक्ष क
नेता को खोया है.हम उस कमी को जल्दी पुरा नहीं कर पाएंगे.हम शोक को संकल्प में बदलेंगे.
उक्त बातें अखिल भारतीय किसान महासभा और अखिल भारतीय खेत ग्रामीण मजदूर सभा की सदस्यता के क्रम में तधवानंदपुर में बैठक को संबोधित करते हुए भाकपा माले नेता व किसान महासभा के जिला अध्यक्ष सुनील कुमार राव ने कहा. उन्होंने कहा कि कॉमरेड रामदेव बर्मा 1980 से 1985 तक समस्तीपुर के बिभूतिपुर निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया और फिर 1990 से 2010 तक माकपा विधायक के रूप में निर्बाध रूप से प्रतिनिधित्व किया। माकपा के साथ उनके मतभेद 1990 के दशक के अंत से बढ़ने लगे और 18 दिसंबर 2020 को वह भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी लेनिनवादी )लिबरेशन यानी सीपीआई(एमएल) में शामिल हो गए. उनके साथ उनकी पत्नी जो बक्सर से दो बार सीपीआई (एम) विधायक और बिहार के महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष कॉमरेड मंजू प्रकाश भी भाकपा माले में शामिल हो गई। महिला आयोग और समस्तीपुर के सैकड़ों कम्युनिस्ट कार्यकर्ता भी भाकपा माले में शामिल हुए।इस समय तक वे कैंसर से पीड़ित थे, लेकिन अपने गिरते स्वास्थ्य के बावजूद वे समस्तीपुर बेल्ट में कम्युनिस्ट आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए अपने लेखन और साथियों के साथ बैठकों में पूरी तरह से डूबे रहे। वह बिहार के सबसे अनुभवी विधायकों में से एक थे और उन्होंने भाकपा (माले) विधायक दल का मार्गदर्शन करने में गहरी दिलचस्पी दिखाई। वह समान नागरिकता आंदोलन से लेकर कृषि के कॉर्पोरेट अधिग्रहण के खिलाफ किसानों के आंदोलन तक चल रहे सभी संघर्षों के बारे में बहुत आशान्वित थे। कॉमरेड मंजू प्रकाश, उनके इकलौते बेटे रोहित और उनके अनगिनत साथियों और प्रशंसकों के प्रति हमारी पार्टी भाकपा माले की गहरी संवेदना है। अलविदा कॉमरेड, आपकी कमी खलेगी, लेकिन आधुनिक भारत के इस महत्वपूर्ण मोड़ पर आपकी विरासत हमें हमेशा प्रेरित करेगी। औएकॉमरेड रामदेव बर्मा को श्रद्धांजलि दी गई. बैठक में माले नेता ठाकुर साह, सुरेंद्र साह, अशोक महतो, हरदेव महतो, संदीप कुमार, पप्पू साह, आजीव साह, गीता देवी, सरोज देवी, सैरुन खातून, ज्ञानती देवी, हिरमती देवी, जोखू महतो, अवध बिहारी पटेल, रमेश पटेल आदि।