संवाददाता आशुतोष तिवारी
सुदामा से परमात्मा ने मित्रता का धर्म निभाया । राजा के मित्र राजा होते हैं रंग नहीं, पर परमात्मा नहीं कहा कि मेरे भक्तों जिसके पास प्रेम धन है वह निर्धन नहीं हो सकता कृष्णा और सुदामा दो मित्र का मिलन ही नहीं जीव व ईश्वर तथा भक्त और भगवान का मिलन था। जिसे देखने वाले अचंभित रह गए थे ।आज मनुष्य को ऐसा ही आदर्श प्रस्तुत करना चाहिए उक्त बातें परम पूज्य गुरुदेव डॉक्टर वाचस्पति ने कथा के दौरान सूडेमऊ में कहीं ।
पट्टी तहसील क्षेत्र के सूडेमऊ गांव में चल रही सात दिवसीय संगीतमय कथा में कथा का रसपान कराते हुए परम पूज्य डॉक्टर वाचस्पति ने कहा कि कृष्ण और सुदामा जैसी मित्रता आज कहां है यही कारण है कि आज भी सच्ची मित्रता के लिए कृष्ण सुदामा की मित्रता का उदाहरण दिया जाता है ।द्वारपाल के मुख से पूछत दीनदयाल के धाम ,बतावत आपन नाम सुदामा सुनते ही द्वारकाधीश नंगे पांव दौड़ते दौड़ते उनकी अगवानी करने जा रहे हैं। लोग समझ नहीं पाए कि आखिर सुदामा में क्या खासियत है कि भगवान स्वयं ही उनकी अगवानी करने दौड़ पड़े ।
श्रीकृष्ण ने स्वयं सिंहासन पर बैठा कर सुदामा के पांव पखारे कृष्ण सुदामा चरित्र श्रद्धालु सुनकर भाव भी हो उठे । उन्होंने आगे कहा कि श्रद्धा के बिना भक्ति नहीं होती तथा विशुद्ध हृदय में ही भागवत टिकती है ।भगवान के चरित्रों का स्मरण करने उनके गुण, यस का कीर्तन ,अर्चन, करना अपने अंतः करण से प्रेम पूर्वक अनुसंधान करना ही भक्ति है ।
श्रीकृष्ण को सत्य के नाम से पुकारा गया जहां सत्य हो वही भगवान का जन्म होता है भगवान के गुणगान सुनने से ही मनुष्य को मोक्ष प्राप्त हो जाती है इस अवसर पर प्रमुख रूप से ग्राम पंचायत अधिकारी श्रीधर तिवारी, रंजन तिवारी, सूर्यकांत, रत्नेश, सुभाष,कुलदीप, दयानंद, सदानंद, पं. रमा,रमाशंकर, आशीष ,परमानंद सहित भक्त मौजूद रहे।