हाजीपुर/वैशाली। कृषि विज्ञान केंद्र हरिहरपुर, वैशाली में वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. अनिल कुमार सिंह के निर्देशन में आरपीएल वर्मी कंपोस्ट प्रोड्यूसर विषय पर दस दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य किसानों एवं युवाओं के पारंपरिक कौशल को औपचारिक प्रमाणन से जोड़ते हुए रोजगार और उद्यमिता के अवसर बढ़ाना है।

कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि प्रोफेसर डॉ. सत्येंद्र कुमार सिंह (हाजीपुर) एवं वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। प्रशिक्षण का संचालन वैज्ञानिक (कृषि अभियंत्रण) कुमारी नम्रता द्वारा किया जा रहा है।

प्रशिक्षण में वर्मी कंपोस्ट उत्पादन से संबंधित सैद्धांतिक एवं प्रायोगिक दोनों प्रकार की जानकारी दी जा रही है। यह कौशल आधारित पाठ्यक्रम बिहार स्किल डेवलपमेंट मिशन द्वारा डिजाइन किया गया है, जिससे प्रशिक्षुओं को औपचारिक कौशल प्रमाणपत्र भी प्राप्त होगा।

मुख्य अतिथि डॉ. सत्येंद्र कुमार सिंह ने वर्मी कंपोस्ट के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जैविक खाद का उपयोग मृदा की गुणवत्ता सुधारने और सुरक्षित कृषि उत्पादन के लिए अत्यंत आवश्यक है। वहीं वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. अनिल कुमार सिंह ने कहा कि रासायनिक खाद और कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग मृदा, पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, इसलिए जैविक खेती समय की जरूरत है।
वैज्ञानिक (उद्यान) डॉ. जोना दाखो ने फसल प्रणाली, फसल चक्र एवं वर्मी कंपोस्ट के योगदान और लाभों पर विस्तृत जानकारी दी। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में वैशाली जिले के विभिन्न प्रखंडों से 30 प्रशिक्षणार्थी भाग ले रहे हैं।
कार्यक्रम के सफल संचालन में इशिता सिंह, ऋचा श्रीवास्तव, रवि कुमार, रमाकांत, रवि रंजन, सोनू, दीपक कुमार एवं मोहित का महत्वपूर्ण योगदान रहा।