सुनील पांडेय -कार्यकारी संपादक
भारत के तथाकथित राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी कहा करते थे यदि हिंदू मंदिरों में मुसलमान नमाज पढ़ेंगे तो इससे देश में दोनों धर्मों के मध्य भाईचारा बढ़ेगा। अपने जीवन काल में महात्मा गांधी ने कई मंदिरों में मुस्लिम धर्म के लोगों द्वारा इस तरह सामूहिक रूप से नमाज अदा कराई गई थी ऐसा कहा जाता है। शायद महात्मा गांधी के विचारों को ध्यान में रखते हुए नंद गांव स्थित नंद बाबा मंदिर में दो मुस्लिम धर्म के व्यक्ति फैजल खान एवं मोहम्मद चांद ने अपने दो अन्य साथियों के साथ मंदिर परिसर में नमाज अदा की। बाद में इसकी तस्वीर सोशल मीडिया पर भी वायरल कर दी । आखिर प्रतिक्रिया तो होनी ही थी क्योंकि अगर मुस्लिम धर्म वाले महात्मा गांधी के विचारों के समर्थक हैं तो हिंदू धर्म वाले क्यों ना हो ,इसी के चलते कल मथुरा में ही चार हिंदू युवकों ने थाना गोवर्धन क्षेत्र में बरसाना रोड पर स्थित ईदगाह में हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ किया। साथ ही इसकी फोटो भी सोशल मीडिया पर वायरल कर दी। इन 4 हिंदू युवकों के नाम हैं सौरभ लंबरदार, राघव मित्तल और कृष्णा ठाकुर यह तीनों जतीपुरा मार्ग गोवर्धन के निवासी हैं और चौथा युवक पुरोहित पाईसा निवासी कान्हा है। पुलिस ने सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने को लेकर इन चारों युवकों को शांति भंग में चालान कर एसडीएम की कोर्ट में पेश कियाl जहां चारों को निजी मुचलके पर रिहा कर दिया गया। मीडिया खबरों से प्राप्त जानकारी के अनुसार थाना गोवर्धन प्रभारी प्रदीप कुमार ने बताया कि पुलिस को जांच में पता चला है कि कल सुबह यानी 3 नवंबर को करीब 10:00 बजे इन चारों युवकों ने ईदगाह में हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ किया। पुलिस चारों को मेडिकल परीक्षण हेतु सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गई जहां युवकों ने जय श्रीराम के नारे भी लगाए। मेरी राय में इस तरह के कृत्य की शुरुआत मुस्लिम धर्म दो व्यक्ति अपने दो साथियों के साथ की आखिर इसकी प्रक्रिया तो आनी ही थी जो आ गई। सांप्रदायिक सौहार्द बनाने का जिम्मा केवल हिंदू धर्म के लोगों ने ले रखा है ।मुस्लिम धर्म के लोग तो सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने में ही जैसे यकीन रखता हो। ऐसा कब तक चलेगा। यह बात सर्वथा सत्य है की भारतीय संविधान में सभी धर्मों को समान आदर एवं सम्मान करने की बात कही गई है अर्थात धर्मनिरपेक्षता पर बल दिया गया है। हमारे देश में प्रायः विभिन्न प्रांतों में इस तरह की सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की घटनाएं आए दिन होती रहती हैं ,जिससे आपसी सौहार्द बिगड़ता है तथा साथ ही साथ संबंधित प्रांतों में जान माल का भी नुकसान होता है । इसको कैसे रोका जाए इस बात पर गंभीरता पूर्वक विचार एवं मंथन करने खुले मन से आवश्यकता है।