संवाददाता आशीष कुमार
इटावा/जसवंतनगर : नगला नरिया में पिछले करीब 20 वर्षों से तालाबों की सफाई नहीं होने से हालात बेहद खराब हो चुके हैं। गांव के दोनों तालाब घास, कीचड़ और गंदगी से पूरी तरह पट गए हैं और अब तालाब जमीन के बराबर नजर आने लगे हैं। अवैध कब्जों के कारण जल निकासी के रास्ते बंद हो गए हैं, जिससे बरसात और गंदा पानी गांव की सड़कों व गलियों में भरा रहता है।

तालाबों में घनी घास उग जाने से पशु चारा चरने जाते हैं और कीचड़ में फंस जाते हैं। कई बार जानवरों को निकालने में ग्रामीणों को भारी मशक्कत करनी पड़ती है। गांव की आबादी करीब दो हजार है और जलभराव व गंदगी के कारण संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका लगातार बढ़ रही है।
स्थिति यह है कि गांव की महिलाएं घर का कूड़ा डालने के लिए सिर पर टोकरी रखकर गलियों के कीचड़ से होकर गुजरने को मजबूर हैं। फिसलन और गंदगी के कारण कई बार महिलाएं रास्ते में गिर भी जाती हैं, जिससे उन्हें चोट लगने का खतरा बना रहता है। बच्चों और बुजुर्गों का घर से निकलना भी मुश्किल हो गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार ग्राम पंचायत और प्रशासन से तालाबों की सफाई कराने, अवैध कब्जे हटाने और जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त कराने की शिकायत की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। समस्या जस की तस बनी हुई है और लोगों को रोजाना गंदगी व जलभराव से होकर गुजरना पड़ रहा है।
गांव निवासी बबलू, प्रदीप, अमलेश यादव, अशोक यादव, इलम सिंह, पंकज सहित लगभग एक दर्जन से अधिक ग्रामीणों ने बताया कि वर्षों से तालाबों की दुर्दशा बनी हुई है। बार-बार शिकायत करने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही तालाबों की सफाई, अवैध कब्जे हटाने और जल निकासी की उचित व्यवस्था नहीं की गई तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उनका कहना है कि जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदे बैठे हैं, जिससे गांव के हालात लगातार बदतर होते जा रहे हैं।