मुंबई। देश के सबसे बड़े और सबसे समृद्ध नगर निकाय मुंबई महानगरपालिका (BMC) में मेयर पद के आरक्षण को लेकर सियासी विवाद गहराता जा रहा है। आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद ने मेयर पद के आरक्षण की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
चंद्रशेखर आज़ाद ने आरोप लगाया कि आरक्षण के स्थापित नियमों में कथित तौर पर फेरबदल कर और लॉटरी प्रक्रिया को संदिग्ध बनाकर मेयर पद को सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित किया गया, जबकि इस बार यह पद अनुसूचित जनजाति (ST) या अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षित होना चाहिए था। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक न्याय की भावना के विरुद्ध बताया।
भीम आर्मी प्रमुख ने यह भी सवाल उठाया कि क्या भाजपा-नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन ने जानबूझकर ST और OBC प्रत्याशियों को ऐसी सीटों से चुनाव मैदान में उतारा, जहाँ उनकी जीत की संभावना नगण्य थी। उनका कहना है कि यह केवल “प्रतिनिधित्व दिखाने” की रणनीति हो सकती है, ताकि वास्तविक सत्ता और निर्णय-प्रक्रिया से बहुजन समाज को दूर रखा जा सके।
चंद्रशेखर आज़ाद ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह मुद्दा किसी व्यक्ति, पार्टी या लिंग का नहीं, बल्कि संविधान प्रदत्त आरक्षण और वास्तविक प्रतिनिधित्व का है। उन्होंने कहा कि बहुजन समाज के अधिकार किसी की कृपा नहीं, बल्कि संविधान से मिले हुए अधिकार हैं, और इन्हें कमजोर करने की किसी भी कोशिश का सड़क से संसद तक लोकतांत्रिक विरोध किया जाएगा।
इस बयान के बाद मुंबई की सियासत में आरक्षण, सामाजिक न्याय और प्रतिनिधित्व को लेकर बहस और तेज़ हो गई है।