संवाददाता मोहन सिंह बेतिया
नशा के लिए तो खाली बदनाम है नशीली पदार्थ। यदि वाकई इन कथन की पुष्टि करनी हो तो आप देख सकते हैं चौक चौराहों व गलियों में लगने वाले एक नम्बरी डिजिटल लाॅटरी खेलाने वाले प्रतिष्ठानों में। जहाँ कतारबद्ध भीड़ बनकर लोग डिजिटल लाॅटरी का होते हैं शिकार। 0 टू 9 का खेल समझ सकें तो डिजिटल जुआ वर्ना यह सिर्फ होगा गणित के अंक।
शायद आम जनता 0 टू 9 को डिजिटल लाॅटरी के रूप में जानती है पर पुलिस प्रशासन इसे सिर्फ व सिर्फ गणित के अंक मानकर अपनी कार्यवाही पीछे कर अपने जेबों का गणित पूरा कर लेती है। खेलने वाले सिर्फ आस लिए खेलते जाते हैं और कमाने वाले उनकी प्रयास से अपना गणित बनाते जाते हैं।
ऐसा ही खेल बेतिया नगर थाना से मात्र आधा किलो मीटर की दूरी पर एक नम्बरी डिजिटल लाॅटरी का संचालन धड़ल्ले से द्वार देवी चौक (लिबर्टी सिनेमा) पर होता है और नगर थाना की सभी गाड़ियाँ एवं अधिकारी इसी रास्ते से होकर ही नगरों में जाते हैं परन्तु किसी की भी नजर इस पान की दुकान पर डिजिटल लाॅटरी का खेल खेलाते नहीं पड़ता है। इसी चौक से वरीय अधिकारी भी समय समय पर नगर थाना भी आते जाते हैं पर किसी को भनक नहीं लगता है इन खेलों का। ऐसा नहीं है कि यह बेतिया का एकमात्र जगह है। बेतिया के पूरब से पश्चिम तक शायद ही ऐसा कोई चौक व गली होगी जहाँ यह खेल खेलाने वाले ना हो। जनता को दिखती है पर पुलिस नहीं देख पाती।हालांकि यह लाॅटरी खेलाने की गोरख धंधा पान की दुकान, जेनरल स्टोर्स की दुकान, किराने की दुकान और अन्य कई तरह के स्वरूप वाले दुकानों में चलता है। इसके साथ ही साथ गली मोहल्लों के सीढ़ीयों पर भी बैठे बैठे एक नंबरी लाॅटरी की दुकान लग जाती है।
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक खेलाने वालों की दबंगता और नेटवर्क के कारण कोई भी प्रबुद्ध सामाजिक लोग इन बातों को सामने रखते नहीं है और सिर्फ दबी जुबानों सै इसकी चर्चा करते हुए समाज पर हो रहे दुष्प्रभाव की से चिंतित रहते हैं।