संवाददाता राजेन्द्र कुमार
वैशाली /राजापाकर
इस बीमारी में जानवर के शरीर पर चेचक जैसे बड़े-बड़े घाव हो जाते हैं. जानवर खाना पीना छोड़ देता है. बुखार 106/7 हो जाता है .बीमारी से अनेक पशुपालकों के जानवर इलाज के बाद बचाया नही जा सका है।
जिससे किसानों में भय व्याप्त है.वही प्रखंड क्षेत्र के नारायणपुर बुजुर्ग ग्राम निवासी शिवपूजन सिंह की 60हजार की गाय का आज लम्पी बीमारी के कारण मौत हो गई .जिसके पूरे शरीर पर चेचक जैसा बड़ा-बड़ा घाव हो गया था. किसान द्वारा काफी पैसा भी इलाज में खर्च किया गया लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका. वही चकसैद ग्राम में भी किसान लालबाबू पासवान के 2 साल के वाछी की मौत लंम्पी बीमारी से हो गई .उक्त किसान द्वारा भी 5हजार खर्च किया गया फिर भी उसे बचाया नहीं जा सका. इस संबंध में पशु चिकित्सक डॉक्टर गौरी शंकर विद्यार्थी से पूछे जाने पर बताया कि इस संबंध में सूचना मिली है सभी पंचायत में लंबी बीमारी का टीकाकरण टीकाकर्मियों द्वारा किया जा रहा है. लेकिन यह टीका जो जानवर को बीमारी हो गया है उसे नहीं देना है. किसान के जानवर को यदि युक्त बीमारी हुई है तो वह पशु चिकित्सक से सलाह लेकर इलाज करें. अधिकतर केस में सफलता मिलती है. यह संक्रामक बीमारी है शुरू में लक्षण पता होने पर बीमारी ठीक हो जाता है।

वहीं स्थानीय ग्रामीण रामनरेश सिंह, घूरन सिंह, अनिल कुमार, मनोज सिंह, दीपक कुमार आदि लोगों ने पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग एवं जिला पशुपालन पदाधिकारी से क्षेत्र में फैले बीमारी की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए विशेष इलाज एवं चिकित्सा द्वारा देखभाल करने की मांग की है।