मंटू राय संवादाता अररिया
अररिया जिला परिषद संभवतः बिहार का ऐसा एकमात्र उदाहरण है जहां लगातार चार चुनावों यानी बीस वर्षों से अध्यक्ष पद पर एक ही परिवार (पति और पत्नी) काबिज है. 2001 में लागू नये स्वरूप वाली त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था के तहत जिला परिषद के प्रथम चुनाव से ही यह क्रम बना हुआ है।कभी पति अध्यक्ष निर्वाचित होते हैं, तो कभी पत्नी.दिलचस्प बात यह भी कि आरक्षण की क्रमावर्तन (रोटेशन) व्यवस्था से अध्यक्ष का पद प्रभावित हुआ तो उसका लाभ भी इसी परिवार को मिल गया।

इन बीस वर्षों के दौरान प्रतिद्वंद्वियों ने इस दंपत्ति को जिला परिषद से बेदखल करने की अनेक कोशिशें की. स्थानीय राजनीति के रथियों एवं महारथियों ने खूब ऊर्जा खपायी. लेकिन, अंगद की तरह जमे उनके पांव उखड़ने की बात दूर, हिल तक नहीं पाये. वो शख्श हैं आफताब अजीम उर्फ पप्पू अजीम ।इस बार भी गुरुवार को होने वाली जिला परिषद अध्यक्ष के चुनाव में बिहार सरकार के पूर्व मंत्री,पूर्व विधान पार्षद डेहटी निवासी मरहुम अजीमउद्दीन के सुपुत्र निवर्तमान जिला परिषद अध्यक्ष आफताब अजीम उर्फ पप्पू का जिला परिषद अध्यक्ष बनना तय है । कोई वैसा चेहरा नहीं जो इसे मात दे सके ।

इनकी मुख्यालय में उपलब्धता,मिलनसारिता एवं जरुरतमंदों के बीच मसीहा इनकी खाशियत है ।अपनी लोकप्रियता से कहीं ये निर्विरोध अध्यक्ष हो जाय तो कोई बड़ी बात नहीं ।