संवाददाता मोहन सिंह बेतिया
बिहार राज्य किसान सभा के पश्चिम चंपारण जिले का 37 वा सम्मेलन विजयकांत ठाकुर नगर मैनाटांड़ में 5 नवंबर को खुलाधिवेषन से प्रारम्भ हुआ । खुला अधिवेशन को सम्बोधित करते हुए बिहार राज्य किसान सभा के अध्यक्ष ललन चौधरी ने कहा कि यह सम्मेलन गंभीर परिस्थिति में हो रहा है । जब देश भारी संकट से गुजर रहा है । केंद्र की मोदी सरकार लगातार किसानों पर हमले कर रही है । अभी 13 महीने तक चली दिल्ली बॉर्डर पर किसानों की ऐतिहासिक धरना से भयभीत हो किसान विरोधी तथा कारपोरेट पक्षीय तीनों काले कृषि कानून को प्रधानमंत्री ने वापस लिया ।
लेकिन यह देश का दुर्भाग्य है कि किसानों से वादा करने के बाद भी अभी तक एम एस पी को कानूनी दर्जा नहीं मिला । स्वामीनाथन आयोग के अनुशंसाओं के आधार पर किसानों को फसल में लागत का डेढ़ गुना दाम नहीं दिया गया । इतना ही नहीं प्रधानमंत्री ने कहा था कि किसानों के फसल का दो गुनी दाम 2022 तक सभी किसानों को मिल जायेगा ।

उन्होंने कहा कि 9 अगस्त क्रान्ति दिवस के दिन बिहार ने निर्णय ले लिया कि इस लुटेरी भाजपा सरकार को बिहार से भगाया जाय। वह बिहार ने कर दिखाया ।
राज्य के संयुक्त सचिव प्रभुराज नारायण राव ने कहा कि आज पश्चिम चम्पारण के किसानों को फसल का हर्जाना नहीं दिया जा रहा। गन्ना का दाम 5 सौ रूपये प्रति क्विंटल नहीं मिला । किसानों के बकाया राशि का ब्याज सहित भुगतान चीनी मिलों द्वारा नहीं दिया जा रहा । बाढ़ से बचाव की कोई व्यवस्था नहीं हो रहा ।
बिहार राज्य किसान सभा के पश्चिम चम्पारण जिला सचिव चांदसी प्रसाद यादव ने कहा कि पश्चिम चम्पारण जिला में बाढ़ और सुखाड़ से भारी नुकसान हुआ है । धान और गन्ना का फसल बर्बाद हो गया । लेकिन सरकार किसानों को फसल का हर्जाना नहीं दे रही है । इस 37 वें सम्मेलन में जिले के कोने कोने से आए किसान प्रतिनिधि विचार विमर्श कर अपनी रणनीति बनाएंगे ।

सभा को जिला अध्यक्ष रामा यादव , स्वागत समिति के कोषाध्यक्ष तथा सिकटा के पुर्व मुखिया संघ के अध्यक्ष अजय यादव तथा मैनाटांड़ प्रखण्ड के पूर्व मुखिया संघ के अध्यक्ष हरेन्द्र प्रसाद , प्रभुनाथ गुप्ता,शंकर कुमार राव , नीरज बरनवाल, सुशील श्रीवास्तव, मोतीलाल प्रसाद , जगरनाथ यादव , वहीद मियां , शिवनाथ प्रसाद राय , गौरीशंकर प्रसाद , जंगबहादुर प्रसाद , शंकर दयाल गुप्ता , सुनील यादव आदि ने विचार दिए ।