संवाददाता-राजेन्द्र कुमार
हाजीपुर वैशाली।राजापाकर-घटना है दिनांक28/03/2021कलयुगी भाई ने अपने ही सहोदर भाई को मामूली बात को लेकर खसी काटने वाला हसुआ से बाह काटकर मौत की घाट उतार दिया।यह घटना काफी दर्दनाक घटना घटी लेकिन स्थानीय प्रतिनिधि मुखियां या प्रखंड स्तरीय कोई अधिकारी नही गये।दलित वस्ती के महिला पुरूषो का कहना है कि दलित के घर पर कोई अगर हादसा होता है तो कोई भी प्रतिनिधि मुखियां या अधिकारी देखने के लिए नही आता है।यहाँ तक कि दाहस्कार के लिए सरकार के तरफ से जो सहायता मिलता है वह भी नही दिया जाता है।जब चुनाव आते है तो अनेकों उम्मीदवार आकर हर तरह के प्रलोभन देते है कि मेरी जीत होगी तो रोड बनबा देगे पेशन बनबा देगे मुफ्त मे आवास दूँगा।लेकिन जीतने के बाद सारे के सारे वादे हवा हवाई हो जाते है।दलित का वोट लेने भर मतलब रहता है लेकिन दलित के विकास से किसी को मतलब नही रहता है सिर्फ प्रतिनिधि अपने विकास करने लगते है।जनता का विकास हो या नही हो अपना विकास होना चाहिए।जब पैसे वालो के घर मे कोई हादसा होता है तो सारे प्रतिनिधि मुखियां से लेकर विधायिका तक पहुंच जाती है लेकिन गरीब को देखने वाला कोई नही है।यहाँ तक कि आवास योजना मे प्रतिनिधि यो ने गरीब दलित से पैसे का डिमांड करते है किपैसा आएगा तो आधा पैसा दोगे तो आवास मिलेगा।गरीब आदमी कहा से पैसे देगे।कमाते है तो खाते है नही तो नही खाएंगे।हमारे वस्ती मे रोड नही बना जब मेरे घर मे किसी का तबियत खराब होता है तो खाट पर रखकर रोड पर ले जाते तब डाक्टर के पास जाते है।दलितों का कहना है कि पांच साल पहले मेरे वस्ती मे फुस का घर जलकर राख हो गया था।उसका मुआवजा आज तक नही मिला है।हमलोगो के साथ ऐसी मुसीबत आते रहता है।सरकार कहती है कि सब का साथ सब का विकास लेकिन मे ऐसा होता नही है।विकास मे बिचौलियों सब बाधा बन जाते है जिससे गरीब का विकास नही हो पाता है।दलित महिला ओ सब का कहना है कि हमलोगो को कोई फायदा नही है।स्थानीय लोग का कहना है कि मृतक के चार छोटे छोटे बच्चे है अब उसे कौन देखेगा।यहाँ तक कि मृतक के दाहस्कार के लिए सरकार पैसा देती है वह भी जनप्रतिनिधि ने नही दिया।
बाईट-पिड़ित दलित