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बाल विवाह मुक्त भारत कार्यक्रम के अंतर्गत पश्चिमी चंपारण जिले में बाल विवाह की रोकथाम एवं जन-जागरूकता को लेकर लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, पटना के निर्देश पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष एवं अवर न्यायाधीश-सह-सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, पश्चिमी चंपारण द्वारा उन्नयन बिहार के माध्यम से डिजिटल लाइव क्लास का आयोजन किया गया।

इस लाइव क्लास के माध्यम से बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के उद्देश्य, कानून एवं सामाजिक दुष्परिणामों पर विस्तृत जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में अवर न्यायाधीश-सह-सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, पश्चिमी चंपारण अमरेंद्र कुमार राज ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए बताया कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली तथा महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के निर्देशानुसार 100 दिवसीय बाल विवाह मुक्त भारत अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत विभिन्न माध्यमों से आम जनता, विशेषकर छात्रों को जागरूक किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि डिजिटल लाइव क्लास के जरिए जिले के विभिन्न विद्यालयों से हजारों छात्र-छात्राएं जुड़कर बाल विवाह के खिलाफ जागरूक हुए, जो समाज में सकारात्मक बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
लाइव क्लास का संचालन कर रहीं शिक्षिका सुश्री मेरी आडलीन ने बाल विवाह की परिभाषा, इसके दुष्प्रभाव, बाल विवाह एवं कानून, बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006, तथा बाल विवाह कराने एवं करने वालों के लिए सजा के प्रावधानों की विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने विद्यार्थियों से अपील करते हुए कहा कि यदि कहीं भी बाल विवाह होता दिखे तो बिना डरे चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, आपात नंबर 112 या महिला हेल्पलाइन 181 पर तुरंत सूचना दें। सूचना देने वालों की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है। 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की और 21 वर्ष से कम उम्र के लड़के का विवाह कानूनन अपराध है।
सुश्री आडलीन ने कहा कि बाल विवाह की रोकथाम सिर्फ प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के हर व्यक्ति का कर्तव्य है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा— “फर्ज नहीं, पाप है बाल विवाह; यह एक गंभीर अपराध है।”
इस कार्यक्रम के सफल आयोजन में जिला समन्वयक राकेश डिक्रूज, गौतम कुमार, विभोर कुमार, मंजीत कुमार सहित अन्य सहयोगियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।