लेखन/सम्पादकीय- डॉ धर्मेंद्र कुमार
“इंतजार करने वाले को उतना ही मिलता है जितना कि कोशिश करने वाले छोड़ देते हैं- डॉ एपीजे अब्दुल कलाम “
जैनुल अबिदीन तथा अशा अम्मा के घर एपीजे अब्दुल कलाम 15 अक्टूबर 1931 को धनुष कोड़ी गांव में रामेश्वरम तमिलनाडु में पैदा हुए l लहरों तूफानी थपेड़ों के विपरीत चलना और अपनी मंजिल तक पहुंचना नाविक की कुशलता प्रदर्शित करता हैl ए पी जे अब्दुल कलाम को हालातों की धार को चीरना और उस पर विजय प्राप्त करना विरासत में मिला था l
प्राथमिक शिक्षा रामनाथपुरम के पंचायत विद्यालय में हुई परिवार की आर्थिक हालत ठीक न होने की वजह से ढिंवरी से पढ़ना और आगे शिक्षा जारी रखने के लिए उन्होंने अखबार वितरित करने का कार्य किया l अब्दुल कलाम ने 1950 में मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से अंतरिक्ष विज्ञान में स्नातक की उपाधि प्राप्त की l स्नातक होने के बाद उन्होंने हावर क्राफ्ट परियोजना पर काम करने के लिए भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संस्थान में प्रवेश लिया l 1962 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन में आए उन्होंने कई परियोजनाओं में सफलतापूर्वक भूमिका निभाई l परियोजना निदेशक के रूप में भारत के पहले स्वदेशी उपग्रह प्रक्षेपण यान slv-3 के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए जुलाई 1982 में रोहिणी उपग्रह सफलतापूर्वक अंतरिक्ष स्थापित कर भारत को प्रौद्योगिकी क्षेत्र में पहचान दिलाई l अपने अनुभव पर अब्दुल कलाम ने लिखा कि “यह मेरा पहला चरण था जिसमें मैंने तीन महान शिक्षकों विक्रम साराभाई, प्रोफेसर धवन और ब्रहम प्रकाश, से नेतृत्व सीखा यह मेरे लिए सीखने का और ज्ञान के अधिग्रहण का समय था l रोहिणी उपग्रह को पृथ्वी की कक्षा के निकट स्थापित कर भारत अंतरराष्ट्रीय क्लब का सदस्य बना l स्वदेशी लक्ष्य भेदी नियंत्रित प्रक्षेपास्त्र गाइडेड मिसाइल को डिजाइन कर अग्नि और पृथ्वी मिसाइल बना रक्षा मंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार तथा शोध और विकास विभाग के सचिव रहे l भारत द्वारा मूल परीक्षण के बाद दूसरी बार 1998 में भारत के पोखरण द्वितीय परमाणु परीक्षण में एक निर्णायक, संगठनात्मक, तकनीकी व राजनीतिक भूमिका निभाई l डॉ कलाम भारत सरकार के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार भी रहे 1998 में पोखरण परीक्षण के बाद भारत परमाणु संपन्न राष्ट्र बन गया l 18 जुलाई 2002 में उन्हें एनडीए के घटक दलों ने अपना राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाया और उन्होंने लक्ष्मी सहगल को परास्त 90% मत हासिल किये l 25 जुलाई 2002 संसद भवन का अशोक कक्ष उनकी शपथ की गवाही बना और 25 जुलाई 2007 तक उन्होंने पूरी निष्ठा, ईमानदारी के साथ पद की जिम्मेदारी निभाई l

अपनी जीवनी “विंग्स ऑफ फायर” में युवाओं को प्रेरित किया वहीं दूसरी पुस्तक “सोल्स- डायलॉग्स ऑफ़ पर्पस ऑफ़ लाइफ” उनके आत्मनिर्भर विचारों को उद्घाटित करती है l राष्ट्रपति पद से मुक्त हो वे पुनः अपने शैक्षिक परिवेश में लौट गए l डॉ कलाम भारतीय प्रबंधन संस्थान शिलांग, भारतीय प्रबंधन संस्थान अहमदाबाद, भारतीय प्रबंधन संस्थान इंदौर, भारतीय विज्ञान संस्थान बेंगलुरु के मानद फेलो विजिटिंग प्रोफेसर बने रहे l भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान तिरुअनंतपुरम के कुलाधिपति अन्ना विश्वविद्यालय, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के सूचना प्रौद्योगिकी और अंतरराष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान हैदराबाद में अध्यापन काम करते रहे l

27 जुलाई 2015 की शाम अब्दुल कलाम भारतीय प्रबंधन संस्थान शिलांग में” रहने योग्य ग्रह ” पर एक व्याख्यान दे रहे थेl अचानक दिल का दौरा पड़ा उन्हें स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया l तमाम चिकित्सकीय कोशिशों के बाद मिसाइल मैन, कवि, लेखक ,वैज्ञानिक, राष्ट्रपति, भारत रत्न डॉक्टर अब्दुल कलाम फानी दुनिया से कूच कर रहने योग्य ग्रह पर क्षितिज में स्थापित हो गए l डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ने भारत को परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में पहचान दिलाने के साथ भारतीय युवाओं को विज्ञान के क्षेत्र में प्रेरित किया l गलियों से कभी अखबार ले लो की आवाज लगाने वाले कलाम ने अपने व्यक्तित्व को निर्बाध क्षितिज पर स्थापित किया l महान व्यक्तित्व एपीजे अब्दुल कलाम को मेरी विनम्र श्रद्धांजलि l