आज का दौर तेज़ी से बदलती तकनीक का दौर है और इस बदलाव के केंद्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) है। स्मार्टफोन, डिजिटल भुगतान, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में AI के बढ़ते उपयोग ने लोगों की दैनिक दिनचर्या को अधिक सरल और तेज़ बना दिया है।
विशेषज्ञों के अनुसार वॉइस असिस्टेंट, नेविगेशन ऐप्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म जैसे डिजिटल साधनों ने जानकारी तक पहुँच को बेहद आसान बना दिया है। डिजिटल भुगतान प्रणालियों के विस्तार से लेन-देन की प्रक्रिया भी तेज़ और सुविधाजनक हुई है, जिससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिला है।

शिक्षा क्षेत्र में AI आधारित प्लेटफॉर्म विद्यार्थियों को उनकी क्षमता के अनुसार सीखने का अवसर दे रहे हैं, वहीं स्वास्थ्य क्षेत्र में स्मार्ट डिवाइस लोगों को अपनी फिटनेस और दिनचर्या पर नज़र रखने में मदद कर रहे हैं।
हालाँकि, विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि बढ़ती तकनीकी निर्भरता से लोगों की निर्णय क्षमता और स्मरण शक्ति प्रभावित हो सकती है। डेटा गोपनीयता, साइबर सुरक्षा और ऑटोमेशन के कारण रोजगार पर प्रभाव जैसे मुद्दे भी चिंता का विषय बन रहे हैं।
सामाजिक स्तर पर भी डिजिटल माध्यमों के बढ़ते उपयोग से आमने-सामने संवाद में कमी देखी जा रही है, जिससे सामाजिक संबंधों पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि AI को सहायक उपकरण के रूप में उपयोग करना चाहिए, न कि निर्णय लेने का पूर्ण विकल्प बनाना चाहिए। संतुलित और जिम्मेदार उपयोग ही तकनीक के लाभ को लंबे समय तक बनाए रख सकता है।
(लेखक: डॉ प्रतिभा रश्मि, कंप्यूटर साइंस विभाग, डॉ भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा)