बाह: कस्बा निवासी एक युवक द्वारा 2 व 3 जुलाई 2020 की रात कानपुर मे हुए जघन्य हत्याकांड में शहीद हुए पुलिस कर्मियों के खिलाफ सोशल मीडिया पर एक आपत्तिजनक टिप्पणी की थी।जो कि सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुई थी। टिप्पणी पर तत्कालीन डीजीपी उत्तर प्रदेश के निर्देश पर तत्कालीन आईजी रेंज आगरा ए सतीश गणेश ने संज्ञान लेकर उक्त युवक के खिलाफ कोतवाली में अपराध संख्या 138 /2020 धारा 153 ए, 505 के तहत मामला दर्ज कराया था।

मामले की जाँच कोतवाली के ही एक उपनिरीक्षक द्वारा की गयी थी। विदित हो अपराधी विकास दुबे द्वारा दबिश देने गए पुलिस कर्मियों की निर्ममता से हत्या की गयी थी जिसकी लोगों ने निंदा कर शहीद पुलिस कर्मियों के परिजनों को न्याय दिलाने की माँग की थी।वहीं कस्बा निवासी अपने आप को अधिवक्ता बताने वाले शिवम दुबे पुत्र विनोद दुबे कांग्रेस नेता निवासी अशोक नगर ने अपनी फेसबुक आईडी से ब्राह्मण शेर बताते हुए पुलिसकर्मियों की हत्या को जायज ठहराया था। भड़काऊ टिप्पणी पर युवक के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।जाँच अधिकारी आशुतोष कुमार उप निरीक्षक ने आधी अधूरी विवेचना कर क्षेत्रधिकारी के कार्यालय में दाखिल की।

तत्कालीन क्षेत्राधिकारी नितेश कुमार ने विवेचना दोषपूर्ण पाए जाने पर विवेचना सही तरीके से करने के निर्देश देकर आई ओ को वापस कर दी। क्षेत्राधिकारी नितेश कुमार का ट्रांसफर होते ही आई ओ आशुतोष ने विवेचना क्षेत्राधिकारी कार्यालय के माध्यम से पुनः दोषपूर्ण एफआर लगाकर न्यायालय में दाखिल कर दी। जब उक्त मामले में पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता लवकुश श्रीवास्तव को जानकारी हुई तो वह अपने पत्रकार साथियों के साथ इस संबंध में 11 मई को आईजी नवीन अरोरा से मिले और पूरे मामले से अवगत कराया। आईजी नवीन अरोरा ने उक्त मामले को गंभीरता से लेते हुए एस एस पी आगरा को दोबारा से जांच कराने के निर्देश दिए।

एस एस पी आगरा मुनिराज ने उक्त एफ आर न्यायालय से वापस मंगा कर मामले की जांच साइबर सेल से करने की संस्तुति कर दी। अब देखना यह है कि क्या उन शहीद पुलिसकर्मियों व उनके परिवार को न्याय मिलेगा ? क्या उक्त मामले में निष्पक्ष जांच होगी ? वहीं कुछ पुलिसकर्मी दबी जुबान में आई ओ द्वारा की गई जांच पर सवाल उठा रहे हैं। शहीद हुए पुलिसकर्मियों के मामले में भी आई ओ ने निष्पक्ष जांच नहीं की। अगर उक्त मामले की जांच सही तरीके से हो तो मामला कुछ और ही निकल कर आएगा।