संवाददाता प्रताप सिंह आजाद
प्रदर्शनी का उद्घाटन रिबिन द्वारा वन अधिकारी आरुषि मिश्रा एवं क्षेत्रीय संगठन मंत्री मनोज नीखरा द्वारा किया गया। प्रदर्शनी में अभाविप के 75 वर्ष के संघर्षों को दिखाया गया साथ ही प्रदर्शनी में ब्रज प्रांत के प्रत्येक जिले के संघर्ष एवं कार्यक्रम की झलक दिखाई गई साथ ही प्रदर्शनी का नाम भगनी निवेदिता प्रदर्शनी रखा गया। यह प्रदर्शनी पूर्ण रूप से मातृशक्ति को समर्पित थी।
प्रदर्शनी के आगे क्रम में :जिसकी प्रथम दीवार अध्यात्म तौर पर हमारी संस्कृति में पूजनीय मात्र शक्ति को समर्पित किया गया वहीं द्वितीय दीवार भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अभिन्न भूमिका रखने वाली मातृ शक्ति महिला स्वतंत्रता सैनानियों को समर्पित थी एवं तृतीय दीवार भारतीय संस्कृति के अनुसार परिवार संकल्पना को समर्पित थी। क्योंकि जब वैदिक रीति की बात आती है तो आज बड़ते दौर के कारण भारतीय परंपराएं जो पाश्चात्य संस्कृति की वजह से प्रभावित होती जा रही है जिससे हमारी संस्कृति मिलिजुली हो गई है। साथ ही विद्यार्थी परिषद विभिन्न आयाम कार्य एवं गतिविधियों के माध्यम से कार्य करती है। प्रदर्शनी में विद्यार्थी परिषद के 75 वर्षों का संघर्षों को छाया चित्र के माध्यम से दिखाया गया। वहीं अभाविप का प्रकल्प सील यात्रा 1963 से 2023 को प्रदर्शनी में झलक देखने को मिली साथ ही विद्यार्थी परिषद द्वारा आगरा में हुए राष्ट्रीय अधिवेशन 1987 व 2019 के छाया चित्र लगाए गए। प्रदर्शनी में लगे चित्र ललित कला संस्थान के छात्रों द्वारा बनाया गया।
अभाविप क्षेत्रीय संगठन मंत्री मनोज नीखरा जी ने कहा – एबीवीपी, कॉलेजों में छात्रों के बीच छिपी हुई विभिन्न प्रतिभाओं को प्रदर्शित करने की प्रवृत्ति को प्रोत्साहित करते हुए, अपनी इकाइयों, खेल बैठकों साहित्यिक और सांस्कृतिक शामों और सम्मेलनों के माध्यम से भी आयोजन करती है – “टैलेंट मीट – प्रतिभा संगम”, “रंगतोरण”, कैरियर मार्गदर्शन और “व्यक्तित्व विकास कार्यशालाएँ” आदि। तकनीकी छात्रों के लिए, तकनीकी अनुप्रयोगों के बारे में प्रतियोगिताएं और एक्सपोज़ आयोजित किए जाते हैं, जिनमें डाइपेक्स, “सृजन”, सृष्टि आदि शामिल हैं। चिकित्सा, आयुर्वेद, फार्मेसी और कृषि छात्रों के लिए भी पूरे वर्ष कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। राष्ट्रीय प्रमुखता संस्थान के छात्रों के लिए थिंक इंडिया’ सम्मेलन और शिखर सम्मेलन, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के छात्रों की छात्रवृत्ति और छात्रावास सुविधाओं के लिए संघर्ष; भावनात्मक बंधनों के माध्यम से राष्ट्रीय एकीकरण को आगे बढ़ाने के लिए, उत्तर-पूर्व के छात्रों के लिए “अंतरराज्यीय जीवन में छात्र अनुभव” सील के हिस्से के रूप में राष्ट्रीय दौरे; पूर्वोत्तर के छात्रों को रोजगार के नए अवसर प्रदान करने के लिए गुवाहाटी में SEIL के तहत “युवा विकास केंद्र”; और इसी तरह कई अन्य गतिविधियों का समन्वय एबीवीपी द्वारा किया जाता है।
वन अधिकारी आरुषि मिश्रा ने कहा कि प्रत्येक कालखंड में मातृशक्ति ने भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन किया है। जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में वह न केवल पुरुष के कंधे से कंधा मिलाकर चली है, अपितु अनेक अवसर पर अग्रणी भूमिका में भी रही है। जब पूरा देश स्वाधीनता आंदोलन का अमृत महोत्सव मना रहा है तब मातृशक्ति के योगदान और बलिदान का स्मरण करना नितांत आवश्यक हो जाता है। भारतीय स्वाधीनता आंदोलन के पृष्ठ पलटेंगे और मातृशक्ति की भूमिका को देखेंगे तो निश्चित ही हमारे मन-मस्तिष्क गौरव की अनुभूति से भर जाएंगे। देश के प्रत्येक हिस्से में महिलाओं ने स्वाधीनता आंदोलन में हिस्सा लिया यानी उन्होंने ब्रिटिश शासन व्यवस्था को उखाड़ फेंकने और स्वतंत्र की स्थापना के लिए अपना स्वर बुलंद किया। आंदोलन के कुछ उपक्रम तो ऐसे रहे, जिनके संचालन की पूरी बागडोर मातृशक्ति के हाथ में रही। इसमें मुख्य रूप से प्रांत संगठन मंत्री मनीष राय ,प्रशांत यादव, प्रियंका तिवारी,शुभम कश्यप, श्रादुल मिश्रा, आशीष चंदेल, डॉ बी. के अग्रवाल,नीरज गोस्वामी,राजू, तेजपाल आदि कार्यकर्ता उपस्थित रहे।