सुनील पांडेय : कार्यकारी संपादक
भारतीय सिने जगत् में अपने अभिनय क्षमता का लोहा मनवाने वाले संजीदा अभिनेता इरफान खान अब हमारे बीच नहीं रहे।भारतीय सिनेमा का यह देदीप्यमान सितारा आज सदा सदा के लिए अस्त हो गया। कैंसर जैसी भयंकर बीमारी से जूझ रहा यह अभिनेता आज मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल 54 वर्ष की आयु में अंतिम सांस ली ।

गौरतलब है कि हाल ही में कुछ दिनों पूर्व इनकी मां सईदा बेगम का भी इंतकाल हुआ था लेकिन लॉकडाउन की वजह से यह अपनी मां के जनाजे में शामिल नहीं हो सके थे । रुपहले पर्दे पर नाम कमाने वाले इस अभिनेता का जन्म जन्म 7 जून ,1967 को जयपुर में हुआ था। अपने मेहनत एवं संघर्ष के बल पर आगे बढ़ने वाला यह अभिनेता अपने शुरुआती दौर में दूरदर्शन के कई धारावाहिकों में दमदार एवं यादगार अभिनय किया था। तत्कालीन समय में दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले चर्चित धारावाहिकों में चंद्रकांता, चाणक्य ,भारत एक खोज एवं जय हनुमान जैसे सीरियल में अपने अभिनय की एक विशिष्ट छाप छोड़ी। टीवी सीरियल से लेकर बॉलीवुड एवं फिर हॉलीवुड में कदम रखने वाला यह जानदार अभिनेता कई फिल्मों में बेहतरीन रोल किया। उन्हीं फिल्मों में कुछ महत्वपूर्ण फिल्में जिनमें उन्होंने अपने अभिनय क्षमता का लोहा मनवाया उनके नाम इस प्रकार हैं -हासिल, मकबूल ,पान सिंह तोमर ,लाइफ इन मेट्रो, 7 खून माफ, लंच बॉक्स, लाइफ ए पाई, पीकू ,हैदर बिल्लू बार्बर ,मदारी और इंग्लिश मीडियम आदि। अपने अभिनय क्षमता के बल पर बॉलीवुड के साथ हॉलीवुड में भी उन्होंने अपनी शानदार उपस्थित दर्ज कराई । बॉलीवुड में नाना पाटेकर के बाद यथार्थ अभिनय करने वाला यदि कोई अभिनेता था तो वह इरफान खान ही थे। बड़ी बड़ी आंखों द्वारा अपने अभिनय को व्यक्त करना इरफान खान के बस की ही बात थी। इसके साथ साथ फिल्मी पर्दे पर दमदार अभिनय करने वाला यह अभिनेता एक शानदार इंसान भी था ।उनकी संवाद अदायगी भी गजब की थी आंखों से ही वह सब कुछ कह देते थे जो वह कहना चाहते थे। अपने शानदार आवाज एवं दमदार अभिनय के बल पर उन्होंने भारतीय फिल्म जगत् में जो मुकाम हासिल किया वह बहुत कम ही लोगों को ही नसीब होता है। भारतीय फिल्म जगत् में तिकड़ी खान बंधुओं के होते हुए अपना एक अलग मुकाम हासिल करना सबके बस की बात नहीं होती ।यह इरफान खान जैसा अभिनेता ही कर सकता है। आज वो हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनके द्वारा अभिनीत फिल्में उन्हें सदा हम लोगों के बीच बनाए रखेंगी। इरफान खान पर यह लाइन सटीक बैठती है -मुझको मेरे बाद जमाना ढूंढेगा । अंत में जनवाद टाइम्स की संपादकीय डेस्क से से इस दिवंगत अभिनेता को विनम्र श्रद्धांजलि।