Government will be strict on companies making cough syrup, ready for big action
ब्यूरो संवाददाता: मनोज कुमार राजौरिया
देश में बने कफ सिरप को विदेशों में बच्चों की मौत से जोड़े जाने के बाद भारत अपनी दवा उद्योग नीति में बदलाव पर विचार कर रहा है। इस बारे में पीएमओ की तरफ के एक डॉक्यूमेंट जारी किया गया है, जिसमें कहा गया है कि कफ सिरप उद्योग ने कई महत्वपूर्ण बातों की अनदेखी की है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीएम मोदी के कार्यालय ने 15 मई को जारी दस्तावेज में कहा, “कथित तौर पर खांसी के सिरप का सेवन करने से गई बच्चों की जान के मद्देनजर, इस समाधान खोजने के लिए हैदराबाद में एक विचार-मंथन सत्र आयोजित किया गया था।” स्वास्थ्य मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया और संघीय और राज्य नियामकों ने फरवरी में सत्र में भाग लिया।
प्रधानमंत्री कार्यालय के दस्तावेज में कहा गया है, “नीति में बदलाव पर विचार किया गया है, क्योंकि पहले महत्वपूर्ण बातों की अनदेखी की जा चुकी है मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने कहा कि नीति में बदलाव का मतलब भारत के 41 अरब डॉलर के फार्मास्युटिकल उद्योग की निगरानी बढ़ाना हो सकता है, जो दुनिया में जेनेरिक दवाओं का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है।
सूत्र ने कहा कि खांसी की दवाई के साथ-साथ दवाओं के लिए कच्चेमाल का परीक्षण बढ़ाना एक ऐसा कदम है, जिस पर विचार किया जा रहा है। भारत के ड्रग रेगुलेटर, सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (सीडीएससीओ) ने कफ सिरप के निर्यात से पहले सरकारी प्रयोगशालाओं मेंटेस्ट के प्रस्ताव दिए हैं।