संवाददाता मोहन सिंह बेतिया
सेवा,सत्संग और साधना की त्रिवेणी है विहंगम योग। विहंगम योग का ध्यान आंतरिक शांति का मार्ग प्रशस्त करता है। एक साधक जब सिद्धासन में बैठकर अपनी चेतना को गुरु उपदिष्ट भूमि पर केंद्रित करता है तो वह मानसिक व आत्मिक शांति का अनुभव करता है।
उपरोक्त बातें स्वर्वेद कथामृत के प्रवर्तक संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज ने पैरामाउंट अकैडमी खैरटिया , बेतिया में आयोजित एक दिवसीय विहंगम योग समारोह एवं मूर्ति संकल्प यात्रा में उपस्थित भक्त शिष्यों के मध्य व्यक्त किये।
महाराज जी ने जय स्वर्वेद कथा के दौरान कहा कि मन पर नियंत्रण न होने से ही समाज में तमाम विसंगतियां फैली हैं।ध्यान से मानव मानवीय गुणों से मंडित होकर दिव्यगुण स्वभाव वाला बन जाता है।
संत प्रवर श्री ने कहा कि मानव के मन में अशांति है और जब तक यह अशांति है तब तक विश्व में शांति की कल्पना नहीं की जा सकती। मन की अशांति को विहंगम योग की ध्यान साधना के द्वारा दूर किया जा सकता है।
उन्होंने भक्तों को बताया कि विहंगम योग का प्रधान सद्ग्रन्थ स्वर्वेद महाग्रंथ को समर्पित स्वर्वेद महामंदिर धाम वाराणसी के पावन परिसर में सद्गुरु सदाफल देव जी महाराज की 135 फुट से भी ऊंची प्रतिमा ( Statue of Spirituality) का निर्माण होने जा रहा है।
संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज की दिव्यवाणी जय स्वर्वेद कथा के रूप में लगभग 2 घंटे तक प्रवाहित होती रही। स्वर्वेद के दोहों की संगीतमय प्रस्तुति से सभी स्रोता मंत्र मुग्ध हो उठे। संत श्री ने ओजस्वी वाणी में ब्रह्मविद्या विहंगम योग के सैद्धांतिक पक्ष को प्रकाशित करते हुए स्वर्वेद की अजस्र ज्ञान गंगा को प्रवाहित किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दिन में 11 बजे सुपूज्य संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी के पावन कर कमलों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।
आयोजकों ने बताया कि इस मूर्ति निर्माण संकल्प महाअभियान के निमित्त बिहार के सभी जिलों में विहंगम योग समारोह मूर्ति निर्माण संकल्प यात्रा कार्यक्रम आयोजित है।
कार्यक्रम में सुपूज्य संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज की अमृतमयी दिव्यवाणी के पश्चात सैकड़ों की तादाद में सेवाभावी भक्त शिष्य मूर्ति निर्माण हेतु अपना संकल्प प्रपत्र भरकर जीवन का आध्यात्मिक मार्ग प्रशस्त किये।
कार्यक्रम में भक्तों को शारीरिक आरोग्यता के लिए कुशल चिकित्सकों द्वारा योग, आयुर्वेदिक, पंचगव्य आदि द्वारा चिकित्सा परामर्श दिया गया।
मानव मन की शांति के लिए दोपहर 2 बजे से आगत नए जिज्ञासुओं को विहंगम योग के क्रियात्मक साधना विधि का उपदेश भी दिया गया। जिसमें सैकड़ों नए जिज्ञासुओं ने साधना विधि सीखकर अपने जीवन का आध्यात्मिक कल्याण पथ पर अग्रसर हुए।
कार्यक्रम में वृहत भण्डारे का भी आयोजन किया गया। कार्यक्रम का समापन बन्दना, आरती एवं शांतिपाठ के द्वारा किया गया।