संवाददाता मोहन सिंह बेतिया
पश्चिम चम्पारण के नौतन प्रखंड के पूर्वी नौतन पंचायत में मनरेगा के तहत भारी अनियमितता का मामला आया सामने आया है। जिसका एक ग्रामीण के द्वारा विडियो भी जिले में वायरल किया गया। जिसके पश्चात हमारे द्वारा भी जीरो ग्राउंड से मामले की पड़ताल भी की गई।

महात्मा गाँधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी अधिनियम भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ने वाला एक बहु अनियमितता की योजना है। जहाँ बिना भ्रष्टाचार के कार्य होना नामुमकिन होता है। शायद इसलिए जिले के पूर्व जिलाधिकारी डॉ निलेश चंद्र देवड़े ने अपने कार्यकाल में मनरेगा का कार्य ही बंद करा रखा था।
आज जब जिले में मनरेगा का कार्य शुरू भी हुआ तो आए दिन भ्रष्टाचार के मामले सामने आते रहते हैं। कहीं बिना मजदूर तो कहीं बाल मजदूर तो कहीं ट्रैक्टर व जेसीबी से कार्य कराए जाने की भी सूचना आती है। वहीं मास्टर रोल में मजदूरों की संख्या और धरातल पर चंद मजदूर ही पाएं जाते हैं। यदि मामला सामने नहीं आया तो जाॅब कार्ड खुले सभी मजदूरों के नाम पर पैसों का उठाव करा लिया जाता है। कहीं कहीं तो जाॅब कार्ड किसी और का और पैसा किसी और के खाते में चला जाता है और इसमें शामिल सभी जनप्रतिनिधि से लेकर अधिकारी तक पूरी योजना के फंड का बंदरबांट कर लेते हैं। सबसे बड़ी बात है कि कभी इन मामलों की खुलासा मीडिया या ग्रामीणों द्वारा होती भी है तो उपस्थित मजदूरों की संख्या का हाजिरी बनाकर ही अपनी कार्य की अनियमितता को दूर करने का दावा मनरेगा के संबंधित अधिकारी करते हैं। 100 दिन के रोजगार की गारंटी मजदूरों के लिए सिर्फ छलावा बना रहता है।
ऐसा ही एक मामला तब सामने आया जब नौतन प्रखंड के एक ग्रामीण संदीप श्रीवास्तव ने मनरेगा का कार्य होते हुए अपना विडियो बनाकर वायरल किया। जिस विडियो की पड़ताल की गई तो वो मामला नौतन प्रखंड के पूर्वी नौतन पंचायत के वार्ड 7,8 और 9 का मामला निकला। जहाँ तीन वार्ड में 180 मजदूरों को कार्य करना है तो वहाँ सिर्फ 8 से 10 मजदूर ही काम करते नजर आए।
साथ ही कार्य स्थल पर ना हि कार्य योजना की बोर्ड लगी थी और ना ही पीआरएस, कनीय अभियंता और सहायक टेक्निशियन ही मौजूद रहते पाए गए। सिर्फ वार्ड सदस्य के भरोसे यह कार्य मास्टर रोल के अनुरूप नहीं कार्य होते देखें गए। नहर बैंड 4 फीट होना चाहिए तो उसके बजड़ मिट्टी को काटकर 2 से 3 फीट कर दिया गया और कटे हुए मिट्टी को उसी सड़क पर बराबर कर समतल कर दिया गया। सड़क की चौड़ाई 14 फीट के जगह 9 से 10 फीट तक ही नजर आई। जिस योजना के तहत नहर की सड़क को 3 फीट तक भरना था उसे सिर्फ 3 से 4 इंच ही भरते देखा गया। वहीं सड़क के सटाकर खेत से 8 से 10 फीट तक गहरा कर मिट्टी खोदकर सड़क व किनारा को समतल किया गया। और जिस तरह खोदकर किनारा भरा गया है वैसे में हल्की से मध्यम वर्षा से ही किनारा का कटाव हो जाएगा और मिट्टी पुनः खेत में चला जाएगा। साथ ही जब वर्षा होगी तो मिट्टी खोदकर जो गहरा गड्ढा किया गया है वो किसी ना किसी दुर्घटना को अंजाम भी दे सकता है। वहीं सड़क से कम से कम तीन फीट की दूरी पर खेत खोदकर मिट्टी निकाली होती है पर उसका भी पालन नहीं होता देखा गया।
वहीं सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार खेत के किसानों को सरकारी योजना का भय दिखा कर जबरन गहरा खोदकर भी मिट्टी निकालने की बात सामने आई है जबकि गहराई ना कर चौड़स में मिट्टी निकालना था। वहीं भोले भाले किसान सरकारी कार्य में आखिर बाधा क्यों बने और जनप्रतिनिधियों के मीठी धमकी से अपनी चुप्पी साध लेते हैं।
वहीं वार्ड सदस्य मन्नान जो कि कार्य स्थल पर मौजूद थे बताया कि हमेशा 25 से 35 मजदूर काम करते हैं जबकि उनके कहे अनुसार उक्त बातें विडियो वायरल के दिन और हमारी मीडिया पड़ताल में सामने नहीं आई। नहर बैंड काटे जाने पर उन्होंने कहा कि सीधा किया जा रहा है जबकि वो भी हकीकत नजर नहीं आई। मनरेगा के अधिकारियों के संबंध में कहा कि आते हैं और कार्य देखकर चले जाते हैं जबकि सूत्र बतातें हैं कि जब तक मीडिया में बात नहीं आई तब तक कोई भी कार्य स्थल पर नहीं जाता था।
वहीं इस पंचायत के मनरेगा का विडियो वायरल करने वाले संदीप श्रीवास्तव से सम्पर्क किया गया तो उन्होंने फिर उस कार्यस्थल पर आकर सारे अनियमितता को कैमरे के सामने उजागर किया।
वहीं पंचायत रोजगार सेवक गोविंद श्रीवास्तव से बात की गई तो उन्होंने बताया कि कार्य लगभग 8 लाख का है और अभी शुरू ही हुआ है 30 अप्रैल तक सारा कार्य मास्टर रोल के तहत ही दिखेगा। वहीं कार्यस्थल पर मजदूरों की संख्या पर उन्होंने कहा कि जितने मजदूर आएंगे उतने की ही हाजिरी बनाई जाएगी। वो स्वयं अब कार्य पर नजर बनाए हुए हैं कोई भी अनियमितता नहीं होने दिया जाएगा। 5 दिन में कार्य दिखने लगेगा।
ऐसे में यह सोचा जा सकता है कि यदि बात सोशल मीडिया व मीडिया में नहीं आती तो यह मनरेगा कार्य भ्रष्टाचार के साथ समझौता कर चुका होता परन्तु सुर्खियों में आने के बाद सोने की अंडा कहे जाने वाली मनरेगा योजना में अब सावधानी बरती जा रही है। और कुल मिलाकर देखा जाए तो मजदूर को कम संबंधितों को मुनाफा कराने वाली बहुगामी योजना के रूप में जानी जाने वाली मनरेगा योजना है।