संभल न्यूज़:1 जनवरी से नहीं चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से प्रारंभ होता है भारतीय नववर्ष-अजय शर्मा

संभल न्यूज़:1 जनवरी से नहीं चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से प्रारंभ होता है भारतीय नववर्ष-अजय शर्मा
Share News

भूपेन्द्र सिंह संवाददाता

संभल:हिंदू जागृति मंच की बैठक में 1 जनवरी को नव वर्ष नहीं मनाने की अपील करते हुए चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से प्रारंभ होने वाले भारतीय नव वर्ष का आध्यात्मिक, वैज्ञानिक एवं सामाजिक महत्व बताया।
ज्ञानदीप मंदिर दुर्गा कॉलोनी में आयोजित हिंदू जागृति मंच की बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि कल 1 जनवरी से प्रारंभ होने वाले अंग्रेजी नव वर्ष को पाश्चात्य संस्कृति का पोषक बता कर त्यौहार की तरह नहीं मनाया जाएगा।

 

 

संभल न्यूज़:1 जनवरी से नहीं चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से प्रारंभ होता है भारतीय नववर्ष-अजय शर्मा

बैठक में अजय गुप्ता सर्राफ ने कहा कि 1 जनवरी को नव वर्ष नहीं बल्कि अंग्रेजी कैलेंडर का वर्ष बदलता है। यह कोई त्यौहार जैसा मनाने का अवसर कदापि नहीं है। बल्कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को महा पर्व के रूप में मनाया जाना अभीष्ट है। इसे मनाने के अनेक वैज्ञानिक, सामाजिक, ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक कारण हैं। श्याम शरण शर्मा ने कहा कि1 जनवरी के समय पर अनेक जीव जंतु शीत सहन न कर पाने के कारण काल के गाल में अनायास ही समा जाते हैं। गरीब लोग बमुश्किल यह भयंकर सर्दी का समय काट पाता है। जबकि चैत्र माह में भारतीय नववर्ष के अवसर पर रंग बिरंगी प्रकृति भी नववर्ष का स्वागत करते हुए नजर आती है। अजय कुमार शर्मा ने कहा कि हिंदू जागृति मंच के सदस्य अंग्रेजी और ईसाई धर्म का प्रतीक स्वरूप मनाया जाने वाला पर्व 1 जनवरी को कोई सदस्य त्योहार की तरह नहीं मनाएगा ऐसा संकल्प लेते हैं। और साथ ही आम जनमानस को भी विस्तार पूर्वक समझाया जाएगा की भारतीय और भारतीयता का प्रतीक 1 जनवरी नहीं बल्कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा है। इसलिए हिंदुस्तान में निवास करने वाले अर्थात भारतीय संस्कृति को मानने और पोषण करने वाले सभी जनों को चैत्र शुक्ल प्रतिपदा कोई नववर्ष पूरे उत्साह, उमंग के साथ नव वर्ष का महापर्व मनाना चाहिए। जिला कोषाध्यक्ष शलभ रस्तोगी ने कहा कि पाश्चात्य संस्कृति का अंधानुकरण हमारे लिए घातक सिद्ध होगा।

 

 

संभल न्यूज़:1 जनवरी से नहीं चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से प्रारंभ होता है भारतीय नववर्ष-अजय शर्मा

हम दुनिया की चकाचौंध में अपनी संस्कृति अर्थात अपनी जड़ों से अलग ना हों। इसका बखूबी ध्यान रखना होगा। अपनी बात को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा “छिपते हुए सूरज से सीखो पश्चिम में गया सो डूब गया।” अर्थात पाश्चात्य संस्कृति हम सबको एक दिन गहरे अंधकार में डूबा देगी। बैठक में नवनीत कुमार, सुभाष चंद्र शर्मा, विष्णु कुमार, सुभाष चंद्र मोंगिया, अनिल रस्तोगी सर्राफ, अतुल कुमार शर्मा, भरत मिश्रा, आशा गुप्ता, नेहा मलय, शशि शंकर लाठे, अमित कुमार शुक्ला, वैभव कुमार गुप्ता, साहिल गांधी आदि अनेक सदस्यों ने अपने विचार व्यक्त किए। बैठक की अध्यक्षता अरुण कुमार अग्रवाल ने की तथा संचालन सुबोध कुमार गुप्ता ने किया।

You may have missed