संवाददाता गुलाब चन्द्र गौतम
प्रतापगढ़: थाना मानधाता शनिदेव धाम के पुजारी परमा महाराज जी नही नही रहे।लोग आते है और चले जाते है किंतु कुछ ऐसे लोग भी होते है जिनके जाने के बाद उनकी स्मृतियां हमारे जेहन में हमेशा के लिए सुरक्षित रह जाती है उनके पुराने साथी नौबस्ता पृथीगंज निवासी सरयू प्रसाद मिश्रा उर्फ कल्लू महाराज ने बताया कि अब नही रहे परमा महराज परलोक सिधार गए प्रेम चंद्र मिश्र उर्फ परमा महाराज भी ऐसे लोगों में से एक थे जिन्हें भुला पाना सहज संभव नही है।उनके न रहने के बाद भी शनिदेव भक्तों में ही नही,समूचे जनपद के लोगो में उनकी यादें हमेशा अवशेष रहेंगी महंथ परमा महाराज जी भगवान शनिदेव के अनंन्य उपासक ही नही बल्कि विलक्षण व्यक्तित्व,मृदुभाषी,व कठोर साधक थे।उनका समूचा जीवन ही विविधताओं से भरा हुआ था।बहु आयामी व्यक्तित्व के धनी प्रेम चंद्र मिश्र मांधाता विकास खंड के जलालपुर ग्राम पंचायत के ग्राम प्रधान भी रह चुके थे।तीन दशक पूर्व वह जिले के माने जाने ठेकेदार तथा कांग्रेस पार्टी के जन प्रिय नेता भी थे।अपने सरल स्वभाव तथा समाजसेवा की भावना के चलते तत्कालीन विधायक लाल प्रताप सिंह के सबसे नजदीकी व्यक्ति थे।उस समय किसी ने इस बात की कल्पना भी नही किया था कि राजनीति की क्षितिज पर मौजूद एक कुशल राजनेता अचानक अपने जीवन की धारा को बदल कर वैराग्य धारण कर शनिदेव मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए हम लोगों के साथ काम शुरू करते समय किसी ने कल्पना भी नही किया था कि कर्मयोगी प्रेमचंद्र मिश्र ने मंदिर निर्माण के साथ साथ ही बकुलाही नदी के आसपास के गावों के काया कल्प करने का भी संकल्प ले लिया है।अपने साथियों तथा आस पास के ग्रामीणों को लेकर उन्होंने मंदिर तथा क्षेत्रीय विकास का जो खाका खीचा उसे अमली जामा पहनाने के लिए उन्हें अपना व्यवसाय, परिवार तथा राजनीति तक छोड़ना पड़ा।वह बियाबान जंगल में एक साधक की भांति धूनी रमाकर बैठ गए।उनके मार्गदर्शन में मंदिर निर्माण का काम शुरू हुआ और देखते देखते शनिदेव का भव्य मंदिर बनकर तैयार हो गया उन्होंने अपने संगठन शक्ति तथा राजनैतिक पकड़ का इस्तेमाल करते हुए न केवल बकुलाही नदी पर पुल का निर्माण कराने के साथ साथ क्षेत्र के कई दर्जन गावो के लोगों को बकुलाही नदी के अभिशाप से मुक्त कराया। विश्वनाथगंज से सीधे पृथ्वीगंज और रानीगंज तक सडक का निर्माण कराकर लोगो को यातायात की सुविधा भी मुहैया कराई।उनकी कठोर साधना का परिणाम है की आज देश के कोने कोने से शनिभक्त शनिदेव धाम पर दर्शन के लिए आ रहे है ।ऐसे युग पुरुष धरती पर बार बार जन्म नही लेते।श्रध्देय परमा महाराज के निधन से समूचे जनपद की एक अपूर्णनीय क्षति हुई है जिसकी पूर्ति सहज संभव नही है।उस विराट व्यक्तित्व के चरणों में शत शत बंदन,अभिनंदन।ईश्वर उनको अपने चरणों में स्थान दें।