संवाददाता मोहन सिंह
बेतिया / पश्चिमी चंपारण। जिला समाहरणालय स्थित संवाद कक्ष में बुधवार को VB-GRAMG (विकसित भारत–रोजगार और आजीविका मिशन गारंटी ग्रामीण) अधिनियम 2025 के संबंध में मीडिया संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता उप विकास आयुक्त काजले वैभव नितिन (भा.प्र.से.) ने की। संवाद का विषय “भ्रम बनाम तथ्य तथा रोजगार से परिसंपत्ति तक” रहा।

इस अवसर पर निदेशक एनईपी (डीआरडीए) पुरुषोत्तम त्रिवेदी, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (मनरेगा), कार्यपालक अभियंता (मनरेगा) तथा जिले के इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

डीडीसी ने बताया कि संसद द्वारा पारित विकसित भारत–रोजगार और आजीविका मिशन गारंटी (ग्रामीण) अधिनियम 2025 ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यह विकसित भारत–2047 के विजन के अनुरूप रोजगार सुरक्षा और स्थायी आजीविका अवसर सृजन पर केंद्रित है।
उन्होंने कहा कि नए प्रावधान के तहत ग्रामीण परिवार के इच्छुक वयस्क सदस्यों को प्रति वित्तीय वर्ष 125 दिनों के अकुशल मजदूरी रोजगार की वैधानिक गारंटी दी जाएगी, जो पहले 100 दिनों की सीमा से अधिक है। तय समय सीमा में काम उपलब्ध नहीं होने पर बेरोजगारी भत्ता देने का भी प्रावधान है।
अधिनियम के तहत जल सुरक्षा, ग्रामीण आधारभूत संरचना, आजीविका संवर्धन और जलवायु अनुकूल कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। सभी कार्य ग्राम पंचायत योजनाओं के माध्यम से ग्राम सभा की सहभागिता से तय होंगे। मजदूरी भुगतान को समयबद्ध बनाने, देरी पर मुआवजा देने, बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण और तकनीक आधारित निगरानी प्रणाली लागू करने पर विशेष जोर दिया गया है।
उन्होंने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक मजदूरी भुगतान और आधार आधारित पंजीकरण से पारदर्शिता बढ़ेगी। योजना के अंतर्गत सभी परियोजनाएं राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना स्टैक से जुड़ी होंगी। कृषि के व्यस्त समय में राज्यों को 60 दिनों तक गतिविधियां अस्थायी रूप से रोकने का प्रावधान भी रखा गया है, ताकि कृषि कार्य प्रभावित न हो।
निधि साझेदारी के तहत पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों के लिए केंद्र और राज्य का अनुपात 90:10 तथा अन्य राज्यों के लिए 60:40 निर्धारित किया गया है। राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर संचालन समितियां योजना की निगरानी और पर्यवेक्षण करेंगी।
ग्राम पंचायतों को योजना के क्रियान्वयन में प्रमुख भूमिका दी गई है। पंचायतें श्रमिक पंजीकरण, रोजगार गारंटी कार्ड जारी करने और कम से कम 50 प्रतिशत कार्यों के निष्पादन के लिए जिम्मेदार होंगी। ग्राम सभा द्वारा नियमित सोशल ऑडिट भी कराया जाएगा।
डीडीसी ने कहा कि डिजिटल उपस्थिति, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर, मोबाइल और डैशबोर्ड आधारित मॉनिटरिंग से योजना में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी।