नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र की शुरुआत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के संयुक्त अधिवेशन को संबोधन के साथ हो गई है। इस संबोधन को लेकर बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति का भाषण परंपरागत अधिक और आम जनता के लिए कम उपयोगी नजर आया।
मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर जारी बयान में कहा कि देश इस समय गंभीर आर्थिक, सामाजिक और वैश्विक चुनौतियों से जूझ रहा है। ऐसे दौर में संसद के बजट सत्र से जनता को ठोस समाधान और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में मजबूत संकेतों की उम्मीद थी, लेकिन संबोधन उस स्तर का नहीं दिखा।
उन्होंने अमेरिका की “America First” नीति का जिक्र करते हुए कहा कि इसका प्रभाव पूरी दुनिया पर पड़ रहा है और भारत भी इससे अछूता नहीं है। ऐसे में सरकार का निजी क्षेत्र पर अत्यधिक भरोसा भारतीय परिस्थितियों में कितना कारगर होगा, इसे लेकर आमजन में आशंकाएं बनी हुई हैं।
बसपा प्रमुख ने यह भी कहा कि सरकार राजनीतिक विरोधियों पर हमलावर होने में जितनी आक्रामक है, उतनी ही प्रखरता आत्मनिर्भरता, विदेश नीति और जनहित के मुद्दों पर भी दिखनी चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि बजट सत्र के दौरान सरकार देशवासियों का आत्मविश्वास मजबूत करने वाले ठोस कदम उठाएगी।
मायावती ने भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच लगभग 20 साल बाद होने जा रहे व्यापारिक समझौते पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि यह समझौता सिर्फ बड़े उद्योगपतियों और पूंजीपतियों के लिए नहीं, बल्कि आम जनता के हित और कल्याण को ध्यान में रखकर होना चाहिए।