Bihar News | बेतिया (पश्चिमी चंपारण)
चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए भाकपा माले के केंद्रीय कमिटी सदस्य सह पूर्व विधायक वीरेंद्र प्रसाद गुप्ता ने कहा कि करोड़ों मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने वाला चुनाव आयोग “मतदाता अधिकार दिवस” मना रहा है, जो महज़ ढकोसला और संविधान से खुला खिलवाड़ है।

उन्होंने कहा कि बिहार में 69 लाख सहित देश के 12 राज्यों में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के माध्यम से लगभग 7 करोड़ मतदाताओं का नाम मतदाता सूची से हटाया गया है। इसके बावजूद चुनाव आयोग द्वारा मतदाता अधिकार दिवस मनाना अपने ही हाथ अपनी पीठ थपथपाने जैसा है।
भाकपा माले इस असंवैधानिक प्रक्रिया का बहिष्कार करती है और इसे लोकतंत्र व संविधान रक्षा दिवस के रूप में मना रही है। उन्होंने लोकतंत्र और मताधिकार की रक्षा के लिए संघर्ष तेज़ करने का आह्वान किया।

सभा को संबोधित करते हुए भाकपा माले जिला कमिटी सदस्य सुनील कुमार राव ने कहा कि भारत के संविधान द्वारा प्रदत्त सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार पर अभूतपूर्व हमला किया जा रहा है। चुनाव आयोग द्वारा SIR के नाम पर बड़ी संख्या में गरीब, प्रवासी मजदूर, महिलाएं, दलित, आदिवासी और अल्पसंख्यकों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं।
वरिष्ठ अधिवक्ता सुशील शशंक ने कहा कि एक ओर वोट देने का अधिकार छीना जा रहा है और दूसरी ओर उसी अधिकार का उत्सव मनाया जा रहा है, जो पूरी तरह से पाखंड है और संविधान की आत्मा के साथ खुला मज़ाक है।
वहीं समाजसेवी पंकज ने कहा कि मताधिकार कोई एहसान नहीं बल्कि नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है। SIR जैसी प्रक्रियाएं लोकतांत्रिक भागीदारी को सीमित करने का औजार बनती जा रही हैं।
इमारत-ए-शरिया के जिला सचिव जाकिर वलिग ने कहा कि बिहार सहित कई राज्यों में बिना पर्याप्त पारदर्शिता के 7 करोड़ वैध मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, जो सीधे तौर पर अनुच्छेद 326 और लोकतांत्रिक मूल्यों का उल्लंघन है।
सभा को काजी शम्सूल हक, प्रोफेसर शम्सूल हक, आलमगीर सहब, संजय यादव, जितेंद्र राम, मोतिउर्र रहमान, विनोद यादव, सुरेंद्र चौधरी, धर्मनाथ कुशवाहा, पोखराज कुशवाहा, बालेश्वर पांडेय, नंदकिशोर ठाकुर, योगेंद्र यादव, सोना देवी, दिलीप श्रीवास्तव सहित अन्य वक्ताओं ने भी संबोधित किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. मोजिउर्र रहमान ने की।