लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) ने समाजवादी पार्टी (सपा) पर दलित, अन्य पिछड़ा वर्ग, मुस्लिम एवं बहुजन समाज के प्रति विरोधी रवैया अपनाने का गंभीर आरोप लगाया है। पार्टी की ओर से जारी बयान में कहा गया कि सपा द्वारा मान्यवर कांशीराम जी की जयंती पर ‘पीडीए दिवस’ मनाने की घोषणा महज़ राजनीतिक दिखावा और वोट बैंक की राजनीति का हिस्सा है।
बीएसपी ने आरोप लगाया कि सपा का राजनीतिक इतिहास दलित एवं बहुजन समाज के महापुरुषों के सम्मान के बजाय उनके अनादर और उपेक्षा से जुड़ा रहा है।
पार्टी ने कहा कि 1993 में सपा-बीएसपी गठबंधन के दौरान कमजोर वर्गों पर अत्याचार रोकने की शर्तों का पालन नहीं किया गया, जिसके चलते 1 जून 1995 को बीएसपी ने समर्थन वापस लिया। इसके बाद 2 जून 1995 को लखनऊ स्टेट गेस्ट हाउस कांड की घटना हुई, जिसे बीएसपी ने लोकतांत्रिक इतिहास का काला अध्याय बताया।
बयान में यह भी कहा गया कि सपा सरकारों द्वारा मान्यवर कांशीराम जी एवं बहुजन समाज के संत-महापुरुषों के नाम पर स्थापित जिलों, संस्थानों और योजनाओं के नाम बदले गए, जिसे पार्टी ने बहुजन समाज के साथ विश्वासघात बताया। बीएसपी ने कांशीराम नगर, संत रविदास नगर सहित अन्य संस्थानों के नाम परिवर्तन का मुद्दा उठाते हुए सपा की नीतियों पर सवाल खड़े किए।
बीएसपी ने सपा पर मुस्लिम समाज के हितों की अनदेखी और पूर्व सरकारों के दौरान हुए सांप्रदायिक दंगों को लेकर भी निशाना साधा। पार्टी का कहना है कि सपा और भाजपा की राजनीति एक-दूसरे को लाभ पहुंचाने वाली रही है, जिसका नुकसान प्रदेश की आम जनता और बहुजन समाज को उठाना पड़ा।
बीएसपी ने यह भी सवाल उठाया कि मान्यवर कांशीराम जी के निधन के समय सपा सरकार द्वारा राजकीय शोक घोषित क्यों नहीं किया गया। पार्टी ने बहुजन समाज से राजनीतिक रूप से सतर्क रहने की अपील की है।