संवाददाता मोहन सिंह बेतिया
भारत-चीन युद्ध की 60 वीं वर्षगांठ पर अमर शहीदो वीर सैनिकों एवं नायकों के सम्मान में सर्वधर्म प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया। जिसमें विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों, बुद्धिजीवियों एवं छात्र छात्राओं ने भाग लिया ।इस अवसर पर सचिव सत्याग्रह रिसर्च फाउंडेशन डॉ एजाज अहमद अधिवक्ता, डॉ सुरेश कुमार अग्रवाल चांसलर प्रज्ञान अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय झारखंड, डॉ शाहनवाज अली, डॉ अमित कुमार लोहिया ,वरिष्ठ अधिवक्ता शंभू शरण शुक्ल, सामाजिक कार्यकर्ता नवीदूं चतुर्वेदी, पश्चिम चंपारण कला मंच की संयोजक शाहीन परवीन ,डॉ महबूब उर रहमान एवं अल के सम्पादक डॉ सलाम ने संयुक्त रूप से कहा कि आज ही के दिन भारत के लोग दीपावली जैसे महत्वपूर्ण वार्षिक उत्सव मनाने में व्यस्त थे। दुश्मन चीन ने घात लगाकर हमारे भारतीय सीमाओं पर हमला कर दिया। एक सप्ताह बाद ही 28 अक्टूबर 1962 को दीपावली का वार्षिक राष्ट्रीय उत्सव था । सारा देश दीपावली की वार्षिक उत्सव मनाने की तैयारियों में व्यस्त था।भारत माता के वीर सपूतों ने भारत की सीमाओं की रक्षा को अपना इबादत समझा। दुश्मन ने विवादित हिमालय सीमा युद्ध के लिए एक मुख्य बहाना बनाया था। चीन में 1959 के तिब्बती विद्रोह के बाद जब भारत ने दलाई लामा को शरण दी तो भारत चीन सीमा पर हिंसक घटनाओं की एक श्रृंखला शुरू हो गयी। भारत ने मैकमोहन रेखा से लगी सीमा पर अपनी सैनिक चौकियाँ पर लगाई जो 1959 में चीनी प्रीमियर झ़ोउ एनलाई के द्वारा घोषित लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल के पूर्वी भाग के उत्तर में थी।
भारत चीन युद्ध 1962,
20 अक्टूबर से 21 नवम्बर 1962लगभग एक महीने तक चला। इस युद्ध में भारत के लगभग 1,383 वीर सैनिक शहीद हुए लगभग1,047 घायल,1,696 लापता हुए जब के दुश्मन चीन के
3,968 बंदी,722 मृत्यु एवं
1,697 घायल हुए।

चीनी सेना ने 20 अक्टूबर 1962 को लद्दाख में और मैकमोहन रेखा के पार एक साथ घात लगा कर हमले शुरू किया था। चीनी सेना दोनों मोर्चे में भारतीय बलों पर उन्नत साबित हुई और पश्चिमी क्षेत्र में चुशूल में रेजांग-ला एवं पूर्व में तवांग पर अवैध कब्ज़ा कर लिया। चीन ने 20 नवम्बर 1962 को युद्ध विराम की घोषणा कर दी और साथ ही विवादित दो क्षेत्रों में से एक से अपनी वापसी की घोषणा भी की, हलाकिं अक्साई चिन से भारतीय पोस्ट और गश्ती दल हटा दिए गए थे, जो संघर्ष के अंत के बाद प्रत्यक्ष रूप से चीनी नियंत्रण में चला गया। 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान, अरुणाचल प्रदेश के आधे से भी ज़्यादा हिस्से पर चीनी पीपल्स लिबरेशन आर्मी ने अवैध रूप से अस्थायी रूप से कब्जा कर लिया था। भारत ने आजादी 1947के बाद से ही विश्व शांति एवं पंचशील के सिद्धांत को दुनिया तक पहुंचाने का प्रयास किया था । भारत ने विश्व शांति, निशस्त्रीकरण ,अहिंसा एवं आपसी प्रेम के विचार जो महात्मा गांधी के थे उस पर चलने का प्रयास किया ।लेकिन दुश्मन ने घात लगाकर हमला किया। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बिरादरी के दबाव में चीन ने युद्ध विराम घोषित किया था। चीनी सेना मैकमहोन रेखा के पीछे लौट गई थी।

भारत-चीन युद्ध कठोर परिस्थितियों में हुई लड़ाई के लिए उल्लेखनीय है। इस युद्ध में ज्यादातर लड़ाई 4250 मीटर (14,000 फीट) से अधिक ऊंचाई पर लड़ी गयी। इस प्रकार की परिस्थिति मे रसद और अन्य लोजिस्टिक समस्याएँ प्रस्तुत की गई। इस युद्ध में चीनी और भारतीय दोनों पक्ष द्वारा नौसेना या वायु सेना का उपयोग नहीं किया गया था। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र संघ एवं विश्व बिरादरी तिब्बती स्वाधीनता सुनिश्चित करें तिब्बत के आध्यात्मिक नेता दलाई लामा एवं भारत समेत विश्व भर के तिब्बती शरणार्थी स्वदेश वापसी की राह निश्चित करें।