Uttar Pradesh News | संवाददाता : संवाददाता पंकज कुमार आलापुर, अम्बेडकर नगर
अम्बेडकर नगर जिले की आलापुर तहसील क्षेत्र में पर्यावरणीय मानकों की अनदेखी कर बड़ी संख्या में ईंट भट्ठों का संचालन किया जा रहा है। आवासीय क्षेत्रों के समीप संचालित इन भट्ठों से पर्यावरण प्रदूषण तथा आमजन के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडराने लगा है।

जहां एक ओर सरकार पर्यावरण संरक्षण को लेकर सख्त नजर आ रही है, वहीं क्षेत्र में कई ईंट भट्ठे निर्धारित मानकों के विपरीत संचालित किए जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार ईंट निर्माण के मानक आकार 190×90×90 मिलीमीटर तथा गारे का आकार 200×100×100 मिलीमीटर निर्धारित है, लेकिन इन मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है।
नियमों के अनुसार दो ईंट भट्ठों के बीच न्यूनतम दूरी एक किलोमीटर होना अनिवार्य है तथा संचालन से पूर्व उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त करना आवश्यक होता है।
इसके अलावा पर्यावरण संरक्षण हेतु कुल भूमि के 33 प्रतिशत हिस्से में वृक्षारोपण, जिग-जैग तकनीक का उपयोग, 12 से 17 मीटर ऊंची चिमनी, मजदूरों को सेफ्टी किट उपलब्ध कराना तथा स्कूल, अस्पताल एवं आबादी से दूरी बनाए रखना अनिवार्य है।
बताया जा रहा है कि कच्ची ईंट निर्माण के लिए बड़े पैमाने पर उपजाऊ मिट्टी का अवैध खनन भी किया जा रहा है, जिससे कृषि भूमि की उर्वरता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। कम कीमत पर किसानों से मिट्टी लेकर व्यापक स्तर पर खनन किए जाने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) एवं राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) द्वारा सभी ईंट भट्ठों को जिग-जैग तकनीक अपनाने और पर्यावरणीय मानकों का पालन करने के निर्देश जारी किए गए हैं। इन आदेशों के अनुपालन में उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) ने भट्ठा संचालकों को नोटिस जारी कर मानकों को शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार जिग-जैग तकनीक अपनाने से कोयले की खपत कम होती है तथा चिमनियों से निकलने वाले धुएं में कमी आती है, जिससे पर्यावरण प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सकता है।
इसके बावजूद आलापुर क्षेत्र में कई भट्ठे बिना पूर्ण अनुमति एवं पर्यावरणीय स्वीकृति के संचालित हो रहे हैं, जिससे स्थानीय नागरिकों में चिंता बढ़ती जा रही है। क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है।