संवाद जनवाद टाइम्स न्यूज
पिनाहट: चंबल नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने के कारण तटवर्ती इलाकों के गांव के रास्ते पूरी तरह से जलमग्न हो गए हैं ।पानी गाँव में घरों के अंदर भर गया है। दर्जनभर गांव का तहसील मुख्यालय से संपर्क टूट गया है। गांवों में आवाजाही पूरी तरह से बंद है। चंबल में बढते जलस्तर के कारण लोग अपनी जान बचाने के लिए ऊंचे टीलों पर तंबू बना कर रहे हैं।

अपने परिवार के साथ पशुओं को लेकर सुरक्षित स्थानों पर जा रहे हैं। प्रशासन द्वारा मदद के लिए राज्य कर्मचारी सतर्क हो गए हैं। तहसील प्रशासन द्वारा जिला प्रशासन से एनडीआरएफ की टीम की मांग की गई है। बता दें मध्यप्रदेश में हो रही बारिश और कोटा बैराज से लगातार पानी छोड़े जाने के चलते चंबल नदी का जलस्तर तेजी के साथ बढ़ रहा है। बुधवार को चंबल का जलस्तर पिनाहट घाट पर खतरे के निशान 132 मीटर को पार कर 135 मीटर देर रात तक पहुंच गया था।

वहीं गुरुवार सुबह पिनाहट पर नदी का जलस्तर 135.80 मीटर पहुंच गया है तटवर्ती इलाकों के ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। चंबल में खतरे का निशान निशांत से 4 मीटर ऊपर पहुंच कर बह रही है। वहीं पानी और बढ़ने की संभावना जताई गई है। तटवर्ती इलाकों के प्रभावित गांव को लेकर प्रशासन द्वारा वन विभाग के चार स्ट्रीमर लोगों के आवागमन एवं राहत सामग्री पहुंचाने के लिए चलाए गए हैं। 10 बाढ चौकियां स्थापित कर राजस्व कर्मचारी और लेखपालों को तैनात किया गया है और ग्रामीणों की हरसंभव सहायता एवं स्वास्थ्य विभाग की टीम को गांव में हीं ठहरने के दिशा निर्देश जारी किए गए हैं।

वही बढ़ते जलस्तर को लेकर गुरुवार को दोपहर जिलाधिकारी आगरा प्रभु एंन सिंह, एसएसपी आगरा मुनिराज, क्षेत्रीय विधायक पक्षालिका सिंह ने पिनाहट चंबल घाट पर पहुंच कर जल स्तर का निरीक्षण किया। साथ ही बाढ़ प्रभावित गांव उमरैठा पुरा पहुंचे ग्रामीणों को हर संभव सहायता का भरोसा दिलाया है।
लगभग चालीस गांव बाढ़ से प्रभावित
चंबल के बढ़ते जलस्तर के कारण चंबल नदी इस समय खतरे के निशान से 4 मीटर ऊपर बह रही है इसके कारण क्षेत्र के लगभग 40 गांव प्रभावित हैं। 10 गांव जो पूरी तरह से जलमग्न हो गए हैं जिनका संपर्क पूरी तरह से टूट गया है।

गांव के रास्ते पूरी तरह से जलमग्न हो कर डूब गए हैं उन गांव में स्ट्रीमर संचालन कराया गया है। स्थिति भयंकर होने पर प्रशासन द्वारा गांव को खाली भी कराया जा सकता है। वही गांव की विद्युत लाइनों बंद कर दिया गया है ताकि कोई जनहानि ना हो सके।
ऊंचे टीले पर जीवन यापन को मजबूर
चंबल नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण आई बाढ़ के चलते बाह और पिनाहट के गांव प्रभावित हो गए हैं। बाढ़ से प्रभावित गांव के लोग अपनी जान बचाने के लिए चंबल के ऊंचे ऊंचे टीलों पर टेंट लगाकर जीवन यापन करने को मजबूर हो गए हैं। वहां से प्रभावित लोग दैनिक वस्तुओं के साथ-साथ अपने पशु पक्षियों को ऊंचे टीले पर ले गए हैं।
प्रशासन की तरफ से नहीं कोई इंतजाम
इस स्थिति में भी प्रशासन ने इन पीड़ितों के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया है जिसके कारण बेघर हुए इन ग्रामीणों को खुले आसमान में फटे तिरपाल को आशियाना बनाया हुआ है तो वहीं खाने पीने की वस्तुओं को लेकर भी लोगों को खासी परेशानी हो रहे हैं। घरों के साथ-साथ गांव में लगे विद्युत पोल भी पूरी तरह से पानी में डूब गए हैं। कोई अप्रिय घटना ना हो इसलिए विद्युत विभाग की ओर से विद्युत सप्लाई को बंद कर दिया गया है जिसके कारण बाढ़ से प्रभावित लगभग 40 गांव अंधेरे में डूबे हुए हैं।
बाढ़ में फंसे युवक की पुलिस ने बचाई जान
बीती रात एक किसान स्टार्टर निकालने पहुंचा और बाढ़ में फंस गया। जान बचाने के युवक पेड़ पर चढ़ गया। घटना की जानकारी होते ही क्षेत्रीय पुलिस मौके पर पहुंच गई। ग्रामीणों की मदद से पुलिस ने युवक को बमुश्किल बाहर निकाल के इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया।

तटवर्ती इलाकों के जलमग्न होने के बाद प्रशासन की नींद उड़ी हुई है। ग्रामीणों की बढ़ती परेशानियों को लेकर अब प्रशासन अपने चेंबर से बाहर निकल कर बाढ़ ग्रस्त इलाकों का दौरा करने को मजबूर हैं।
वन विभाग ने लगाए 4 स्ट्रीमर
बाढ़ से घिरे गांव में लोगों के आवागमन के लिए प्रशासन द्वारा वन विभाग के 4 स्ट्रीमर का संचालन किया जा रहा है जिनके माध्यम से वहां फंसे लोगों को निकाला जा रहा है तो खाद्य सामग्री भी उपलब्ध कराई जा रही है।
जिलाधिकारी का बयान
गुरुवार को बाढ़ प्रभावित गांवों एवं चंबल के जलस्तर का जायजा लेने पहुंचे जिलाधिकारी आगरा प्रभु एन सिंह का कहना है।

कि प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। हर संभव सहायता की जाएगी चौकिया स्थापित की गई है। जलस्तर पिनाहट घाट पर 135.80 है। ऊपर से पानी घटना शुरू हो गया है। पिनाहट बाहर क्षेत्र में भी जल स्तर में गिरावट देखने को मिलेगी।