संवाददाता मोहन सिंह बेतिया
कोई हमारा परिचय पूछे तो हम अपना नाम, पद इत्यादि बताते हैं। लेकिन वास्तव में हम इस शरीर को चलाने वाली चैतन्य शक्ति ऊर्जा है शरीर तो हड्डी मांस का पुतला है। भौतिक परिचय शरीर के साथ खत्म हो जाता है, हर जन्म में नए रिश्ते नया नाम व पद हो जाता है शरीर के लिए मेरा कहते हैं मेरा हाथ ,मेरा पैर मैं हाथ मैं पैर नहीं कहते मैं तो अजर, अमर, अविनाशी आत्मा हूं ।आत्मा का रूप अति सूक्ष्म सफेद बिंदी है लेकिन उसका तेज हीरे से भी ज्यादा है ब्रेन में पिट्यूटरी ग्रंथि वह हाइपोथैलेमस ग्रंथि के बीच में आत्मा निवास करती है यह बातें इंदौर से पधारी प्रख्यात तनाव मुक्ति विशेषज्ञा ब्रह्माकुमारी पूनम बहन ने प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, प्रभु उपवन भवन, संत घाट के द्वारा बेतिया के महाराजा स्टेडियम में आयोजित “अलविदा तनाव” निशुल्क शिविर के तीसरे दिन के सत्र में ‘आत्म ज्ञान उत्सव’ के अंतर्गत कही आपने बताया की आत्मा के शरीर से निकल जाने को मृत्यु कहा जाता है लेकिन स्वयं को आत्मा महसूस करने से मृत्यु का भय समाप्त हो जाता है ।उन्होंने बार-बार अभ्यास करने के लिए आज का स्पिरिचुअल इंजेक्शन (मंत्र )दिया कि- मैं एक शक्तिशाली आत्मा हूं, प्रकाश पुंज हूं शक्तिपुंज हूं मेरे लिए कोई भी बात असंभव नहीं है “तथा आत्म स्वरूप का कंमेट्री वह वीडियो के दृश्यों के माध्यम से मेडिटेशन द्वारा गहन अनुभूति भी कराई।
उन्होंने आगे बताया कि यदि हर घंटे में 1 मिनट मस्तक सिंहासन पर चमकती हुई ज्योति बिंदु आत्मा देखेंगे तो (1)मन के व्यर्थ संकल्प बंद हो जाएंगे (2) ऐसा लगेगा कि मानसिक तनाव को जैसे किसी ने खींच लिया हो (3) आत्मा महसूस करने से हीलिंग पावर आती है रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है जिसे कई प्रकार की शारीरिक बीमारियों से मुक्त हो जाते हैं (4) एकाग्रता बढ़ जाती है जिससे हमारी ग्रहण शक्ति बढ़ जाती है व सभी कार्य भी जल्दी होने लगते हैं फिर उन्होंने मनोबल बढ़ाने के लिए जीवन से न हार जीने वाले गीत…. पर सभी को डांस करवाया।

ब्रह्माकुमारी पूनम बहन जी ने खुश रहने का एक सुंदर फार्मूला “स्वीकार करना”उन्होंने इसका विस्तार करते हुए बताया कि (1) जो भी हो रहा है उसे स्वीकार कर ले (2) जो बीत गया उसे भी खुशी से स्वीकार कर ले जो हुआ अच्छा हुआ जो चल रहा है वह भी अच्छा और जो भी होगा वह बहुत बहुत अच्छा-ऐसा सोचने में इतनी ताकत है कि हर घटना अच्छे में परिवर्तन हो जाएगी (3) आपके साथ व आसपास के लोग जैसे भी हैं उन्हें उसी रूप में स्वीकार कर ले, क्योंकि इस विश्व रंगमंच पर हर एक एक्टर का संस्कार स्वभाव या पार्ट अलग-अलग है ।उसे देखकर आनंद लेना है वह अपना एक्यूरेट पार्ट बजा रहे है, यदि कोई हमारे साथ गलत भी कर रहा है तो उसे पूर्व कर्मों का हिसाब किताब समझ कर उसे दुआएं दें तो उसके प्रभाव से नेगेटिव का प्रभाव क्षीण हो जाएगा मस्तक सिंहासन पर बैठ संकल्प करो कि मैं शक्तिशाली आत्मा हूं, मन की मालिक हूं तो मन मित्र बन जाता है व जैसा उसे आदेश देते हैं वैसा ही वह सोचता है अंत में उन्होंने मेडिटेशन कमेंट्री द्वारा सर्व को आत्म स्वरूप की शक्तिशाली अनुभूति कराई
कल इस शिविर में आनंद उत्सव मनाया जाएगा आत्मा का अपने परमपिता से मंगल मिलन होगा, बड़ी संख्या में शहर वासी इस शिविर का लाभ लेकर स्वयं को तनाव मुक्त बना रहे हैं।

शिविर के अंत में पिंजरापौल गौशाला के सचिव सुरेश सिंघानिया गौशाला से जुड़ी सभी कार्यकारिणी सदस्यों ने सौल ओढाकर के दीदी को सम्मानित किए।