संवाददाता मोहन सिंह बेतिया
विश्व शांति एवं मानवता की प्रतिमूर्ति तिब्बत के आध्यात्मिक धर्मगुरु नोबेल पुरस्कार विजेता दलाई लामा समेत विश्व के सभी शरणार्थियों का निश्चित समय अवधि में सुरक्षित स्वदेश वापसी सुनिश्चित करें संयुक्त राष्ट्र संघ एवं विश्व बिरादरी।विश्व शांति एवं मानवता की रक्षा को आगे आए विश्व बिरादरी । सत्याग्रह रिसर्च फाउंडेशन एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों ने अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस पर की अपील। आज दिनांक 21 सितंबर 2022 को अंतरराष्ट्रीय शांति दिवसके अवसर पर एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन सत्याग्रह रिसर्च फाउंडेशन के सभागार सत्याग्रह भवन में किया गया, जिसमें मे विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों, बुद्धिजीवियों एवं छात्र छात्राओं ने भाग लिया। इस अवसर पर सचिव सत्याग्रह रिसर्च फाउंडेशन डॉ एजाज अहमद अधिवक्ता, डॉ सुरेश कुमार अग्रवाल चांसलर प्रज्ञान अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय झारखंड, डॉ शाहनवाज अली, डॉ अमित कुमार लोहिया, वरिष्ठ अधिवक्ता शंभू शरण शुक्ल, सामाजिक कार्यकर्ता नवीदूं चतुर्वेदी, पश्चिम चंपारण कला मंच की संयोजक शाहीन परवीन, अल बयान के संपादक डॉ सलाम एवं मोहम्मद महबूब उर हक ने संयुक्त रूप से दुनिया भर में उन लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की जिन्होंने विगत वर्षों में प्राकृतिक आपदाओं ,युद्ध ग्रस्त क्षेत्रों एवं विभिन्न घटनाओं में अपने प्राणों की आहुति दी। प्रत्येक वर्ष दुनिया भर में 21 सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस के तौर पर मनाया जाता है। दुनिया के तमाम देशों एवं लोगों के बीच शांति के आदर्शों को बढ़ावा देने के लिए संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 1981 से इस दिवस की शुरुआत की । इसके बाद पहली बार इसे साल 1982 के सितंबर माह के तीसरे मंगलवार को मनाया गया था। 1982 से लेकर साल 2001 तक अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस को सितंबर माह के तीसरे मंगलवार को मनाया गया। दो दशक बाद 2001 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने एक राय से इस दिन को अंहिसा और युद्धविराम का दिन घोषित किया। इसके बाद अभी तक हर साल 21 सितंबर के दिन अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस मनाया जा रहा है।

पहली बार इस दिवस को 1982 में कई राष्ट्रों, राजनीतिक समूहों, विभिन्न सामाजिक संगठनों, सैन्य समूहों और लोगों द्वारा मनाया गया था। 2013 में संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने इसे शांति शिक्षा के लिए समर्पित किया।
प्रत्येक वर्ष इस दिन की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय (न्यूयॉर्क) में संयुक्त राष्ट्र शांति घंटी बजाकर की जाती है। संयुक्त राष्ट्र शांति घंटी साल में दो बार बजाई जाती है। बसंत के पहले दिन एवं दूसरी बार अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस 21 सितंबर को। यह घंटी अफ्रीका को छोड़कर सभी महाद्वीपों के बच्चों द्वारा दान किए गए सिक्कों से बनाई गई है। जिसे जापान के युनाइटेड नेशनल एसोसिएशन ने उपहार में दिया था। ये घंटी युद्ध में मानव की कीमत की याद दिलाती है। इसके साइड में लिखा है विश्व में शांति हमेशा बनी रहे। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र ने हर साल की तरह इस साल भी अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस मनाए जाने के लिए थीम जारी की है। इस साल की थीम है – “End racism. Build peace” । यानी जातिवाद को खत्म करें, शांति को प्रोत्साहित करें। संयुक्त राष्ट्र का मानना है कि सही मायने में शांति का मतलब सिर्फ हिंसा न होना ही नहीं है बल्कि ऐसे समाज का निर्माण करना भी है जहां सभी लोगों को लगे कि वे फल-फूल सकते हैं, आगे बढ़ सकते हैं। एक ऐसी दुनिया का निर्माण करना है जहां सभी के साथ उनकी जाति की परवाह किए बिना समान व्यवहार किया जाए। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र एवं विश्व बिरादरी के प्रयासों के बावजूद आज विश्व के अनेक हिस्सों में हिंसा एवं युद्ध जारी है। हम सब विगत 75 वर्षों में फलस्तीन इजरायल संघर्ष,पश्चिम एशियाई देशों में संघर्ष , एशिया अफ्रीका एवं लोटिन अमेरिका के कई देशों में शांति लाने में विफल रहे हैं। आज फलस्तीनी शरणार्थी, तिब्बती शरणार्थी, म्यानमार के रोहिंग्या मुस्लिम शरणार्थी, श्रीलंका के तमिल शरणार्थी अपनी स्वदेश वापसी के लिए संयुक्त राष्ट्र एवं विश्व बिरादरी की ओर आंखें बिछाए खड़े हैं।

रूस द्वारा यूक्रेन में युद्ध जारी है ।चीन द्वारा तिब्बत पर नाजायज कब्जे के साथ ही ताइवान पर उसकी बुरी नजर है। इस मंच के माध्यम से हम संयुक्त राष्ट्र संघ एवं विश्व बिरादरी से अपील करते हैं कि बातचीत एवं शांति प्रयासों के माध्यम से विश्व के अशांत क्षेत्रों में स्थाई शांति लाने का प्रयास किया जाए। साथ ही विश्व शांति एवं मानवता की प्रतिमूर्ति नोबेल शांति पुरस्कार विजेता सह तिब्बत के आध्यात्मिक धर्मगुरु दलाई लामा एवं उन लाखों शरणार्थियों का सुरक्षित निश्चित समय अवधि में सुरक्षित स्वदेश वापसी हो सके।