Establishment of egalitarian society in independent India depended on Dhanna Seth: Dr. Dharmendra Kumar
लेखक- डॉ धर्मेंद्र कुमार
आजकल सत्ता पक्ष के लोग समर्थक खूब परेशान हैं किंतु मुंह खोलने में अपनी तौहीन समझ रहे हैं शायद उनका सोचना है कि
तेरी बेवफाई का शिकवा करूं ,तो मेरी मोहब्बत की तोहीन होगी
के आधार पर बुराई ना करके आदर्श राज बताने में नहीं चूक रहे हैं ,मौतों को मुक्ति बता रहे हैं तो बचे लोगों पर मोदी जी का आशीर्वाद बता रहे हैं l
वही सत्ता से बाहर लोग लाशें गिनने में, शमशान की स्थिति ,गंगा की तैरती लाशें ,रेती में गढे शव, अस्पतालों में इलाज का अभाव, विभागों की बिक्री ,बेरोजगारी, भुखमरी ,गैस, पेट्रोल-डीजल दामों की बढ़ोतरी गिनाने में व्यस्त हैं l संघ तथा प्रधानमंत्री मुख्यमंत्री को कोस कर खुद को जन हितेषी बताने में व्यस्त हैं
मान लो मोदी -योगी सब को गद्दी से उतार दिया जाए और विपक्ष या सभी आलोचकों को गद्दी पर बैठा दिया जाए तो
इनके पास क्या रोडमैप है? क्या यह लोग इन सारी कमियों को दूर कर पाएंगे ? क्या ऑक्सीजन बेड गैस डीजल पेट्रोल सब सामान्य कर पाएंगे ? क्या बिके हुए सरकारी विभाग वापस कर रोजगार भुखमरी से निजात दिला पाएंगे? जिन्हें संविधान की बात छोड़ो, किसी विचारक की विचारधारा की बात छोड़ो -प्रार्थना पत्र लिखने तक का ज्ञान नहीं है वे फेसबुक व्हाट्सएप पर पक्ष- विपक्ष के चश्मे से सिर्फ और सिर्फ ज्ञान बांट रहे हैं ?
देसी जुगाड़ में हैं कि यदि हम सत्ता में आ जाएं तो हमारी बल्ले बल्ले हो जाएगी l