Bihar News: पश्चिम चंपारण को हाथीपांव मुक्त बनाने का संकल्प, 10 फरवरी से शुरू होगा सर्वजन दवा सेवन अभियान

पश्चिम चंपारण में 10 फरवरी से हाथीपांव उन्मूलन अभियान, 45 लाख लोगों को खिलाई जाएगी दवा
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संवाददाता: मोहन सिंह
बेतिया / पश्चिमी चंपारण।

पश्चिम चंपारण जिले को फाइलेरिया (हाथीपांव) जैसी गंभीर बीमारी से मुक्त करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने व्यापक तैयारी पूरी कर ली है। जिले में 10 फरवरी से सर्वजन दवा सेवन अभियान शुरू किया जाएगा। इस अभियान के तहत 45,14,193 लोगों को दवा खिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

पश्चिम चंपारण में 10 फरवरी से हाथीपांव उन्मूलन अभियान, 45 लाख लोगों को खिलाई जाएगी दवा

इस संबंध में जिला स्वास्थ्य समिति और सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च (CFAR) के संयुक्त सहयोग से जीएमसीएच पैरामेडिकल कॉलेज सभागार में मीडिया कार्यशाला आयोजित की गई।

अभियान की रूपरेखा और तैयारी

कार्यशाला को संबोधित करते हुए अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. रमेश चंद्रा ने कहा कि जिला स्वास्थ्य समिति फाइलेरिया उन्मूलन को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है। अभियान के सफल संचालन के लिए 2237 प्रशिक्षित टीमों की तैनाती की गई है, जो 14 दिनों तक घर-घर जाकर लोगों को अपने सामने दवा खिलाएंगी।

उन्होंने बताया कि 11 फरवरी को जिले भर में एमडीए मेगा कैंप आयोजित किए जाएंगे। निगरानी के लिए 224 पर्यवेक्षक लगाए गए हैं तथा प्रत्येक प्रखंड में त्वरित प्रतिक्रिया दल (RRT) का गठन किया गया है।

मरीज की पीड़ा और आशा कार्यकर्ता की अपील

सीएचओ लीड पीएसपी मेंबर एवं आशा कार्यकर्ता मालती देवी ने कहा कि इस बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका समय पर दवा का सेवन है। उन्होंने कहा कि आशा कार्यकर्ता घर-घर पहुंचकर लोगों को जागरूक कर रही हैं।
वहीं फाइलेरिया मरीज जुबेदा खातून ने अपनी आपबीती साझा करते हुए कहा कि हाथीपांव होने के बाद जीवन काफी कठिन हो जाता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि स्वास्थ्यकर्मियों के सामने दवा जरूर खाएं, ताकि इस बीमारी से बचाव हो सके।

दवा की सुरक्षा और भ्रांतियों का निवारण

जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. हरेंद्र कुमार ने बताया कि अभियान में दी जाने वाली दवाएं पूरी तरह सुरक्षित हैं। दवा खाने के बाद हल्की चक्कर या बेचैनी महसूस होना इस बात का संकेत हो सकता है कि शरीर में मौजूद परजीवी नष्ट हो रहे हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उच्च रक्तचाप और मधुमेह के मरीज भी यह दवा ले सकते हैं।

विशेष सावधानियां और निर्देश

स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि दवा केवल स्वास्थ्यकर्मियों की उपस्थिति में ही खिलाई जाएगी, इसका वितरण नहीं किया जाएगा।

दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को दवा नहीं दी जाएगी। साथ ही दवा खाली पेट नहीं लेने की सलाह दी गई है। विशेषज्ञों के अनुसार लगातार पांच वर्षों तक साल में एक बार दवा सेवन करने से फाइलेरिया का खतरा लगभग समाप्त हो जाता है।

इस मौके पर भीबीडीसी सुशांत कुमार, प्रशांत कुमार, पिरामल फाउंडेशन से राजू कुमार सिंह और अब्दुल्ला अंसारी, डब्ल्यूएचओ प्रतिनिधि सहित CFAR के सदस्य उपस्थित रहे।

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