जसवंतनगर/वाराणसी। काशी के 84 घाटों में प्रमुख धार्मिक महत्व रखने वाले मणकर्णिका घाट से न्यायप्रिय एवं धर्मपरायण सम्राज्ञी माता अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा को हटाए जाने को लेकर जनआक्रोश बढ़ता जा रहा है। इस संबंध में जसवंतनगर निवासी डॉ. धर्मेन्द्र कुमार ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर कड़ा विरोध जताया है।
ज्ञापन में बताया गया है कि मणकर्णिका घाट काशी के पंचतीर्थों में प्रमुख स्थान रखता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार “काश्यां मरणं मुक्ति, स्नानं मणकर्णिका” अर्थात काशी में मृत्यु मोक्ष का द्वार है और मणकर्णिका में स्नान उसका आरंभ माना जाता है। इस घाट से जुड़ी अनेक धार्मिक कथाएं शिव-पार्वती, भगवान विष्णु, माता सती और राजा हरिश्चंद्र से संबंधित हैं, जो इसे अत्यंत पवित्र और ऐतिहासिक बनाती हैं।
डॉ. धर्मेन्द्र कुमार ने बताया कि मणकर्णिका घाट का निर्माण पेशवाकाल में हुआ था, जबकि इसका जीर्णोद्धार न्यायप्रिय सम्राज्ञी माता अहिल्याबाई होल्कर द्वारा कराया गया था। दुर्भाग्यवश, हाल ही में बिना धार्मिक समाजों एवं धनगर, पाल, गडरिया, बघेल व होलकर समाज को विश्वास में लिए गए प्रशासनिक निर्णय के तहत घाट और माता अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा को बुलडोजर कार्रवाई में ध्वस्त कर दिया गया। आरोप है कि प्रतिमा को मलबे में डाल दिया गया, जिससे धार्मिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची है।
सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों और वीडियो के बाद हिंदू समाज एवं संबंधित समुदायों में भारी रोष व्याप्त है। इसे धर्मविरोधी और निंदनीय कृत्य बताते हुए सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई है।
मुख्यमंत्री को भेजे गए मांग पत्र में प्रमुख रूप से—नव-निर्मित मणकर्णिका घाट पर माता अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा पुनः स्थापित कर यथोचित सम्मान देने, घाट का नामकरण “अहिल्याबाई होल्कर मणकर्णिका घाट” किए जाने, घाट से जुड़े कर्मचारियों, सेवाकर्मियों एवं पुरोहित पदों में 50 प्रतिशत आरक्षण पाल, गडरिया, धनगर व होलकर समाज को दिए जाने की मांग की गई है।
डॉ. धर्मेन्द्र कुमार ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने शीघ्र इन मांगों पर विचार नहीं किया, तो जनमानस आंदोलन के लिए विवश होगा।