आर्टिकल कुंदरकी

नम्रता : चल पड़ी मैं दैनिक क्रिया से निर्वित्त होने

  नम्रता : वरिष्ठ रचनाकार जया मोहन प्रयागराज एक सीधी सादी अपने मे खोई हुई। खुद अपनी सुंदरता से अनजान अल्हड़ सहमी हिरनी सी मैं बात कर रही हूं अपने पड़ोस में आई एक लड़की की मेरे मन मे उसकी यही छवि थी। मैं कहती माँ बाप के रखे नाम जैसे गुण है।कितनी विन्रम मितभाषी।मुझसे […]