Skip to content

जनवाद टाइम्स

Primary Menu
  • Home
  • Latest News
  • National
  • Bihar
  • Politics
  • Crime
  • Jobs
  • Business
  • Sports
  • Technology
  • Live
  • Contact Us
Light/Dark Button
  • Home
  • Breaking News
  • डॉ भीमराव अंबेडकर एक परिचय – श्वेतांक कृष्ण
  • Breaking News

डॉ भीमराव अंबेडकर एक परिचय – श्वेतांक कृष्ण

जनवाद टाइम्स 14 April 2021

Share this:

  • Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp
  • Share on Facebook (Opens in new window) Facebook
  • Share on Telegram (Opens in new window) Telegram
  • Share on X (Opens in new window) X
डॉ भीमराव अंबेडकर एक परिचय - श्वेतांक कृष्ण

अंबेडकर जयंती पर विशेष आलेख
डॉ भीमराव अंबेडकर एक परिचय – श्वेतांक कृष्ण

 डॉ भीमराव अंबेडकर एक परिचय - श्वेतांक कृष्ण

भारतीय राजनीति में कुछ ऐसे देदीप्यमान नक्षत्र हुए हैं जो अपने जीवन काल में ही नहीं वरन् इस दुनिया से अलविदा होने के बाद भी अपने प्रतिभा एवं संघर्ष के बल पर तत्कालीन भारतीय समाज को एक नया आयाम दिया। उन्हीं नामों में से एक विद्या के धनी,अद्भुत प्रतिभा, निष्ठावादी तथा स्पष्टवादीता के धनी डॉ भीमराव अंबेडकर का नाम आता है ।

 डॉ भीमराव अंबेडकर एक परिचय - श्वेतांक कृष्ण

दलित जीवन की यातनाओं को सहते हुए पले-बढे़ डॉ भीमराव अंबेडकर जीवन भर दलितों के लिए संघर्ष करते रहे। उस समय की अस्पृश्य एवं त्याज्य समझी जाने वाली दलित जातियों के लीए उनके द्वारा किए गए पुनीत कार्यों के कारण उन्हें ‘दलितों का मसीहा‘ के नाम से संबोधित किया गया।
आगे हम उनके जीवन पर प्रकाश डालते हुए उनका संक्षिप्त जीवन परिचय प्रस्तुत कर रहे हैं। मध्य प्रदेश राज्य के इंदौर जनपद के समीप महू छावनी में 14 अप्रैल,1891 को एक पिछड़ी जाति (महार) परिवार में भीमराव अंबेडकर का जन्म हुआ। महार जाति अछूत मानी जाती थी। तत्कालीन सवर्ण समाज द्वारा उस पर तरह तरह के प्रतिबंध लगाएं गए थे। जिसके चलते समाज में उस जाति को हेय एवं घृणा की दृष्टि देखा जाता था। प्राथमिक शिक्षा के दौरान उन्हें पाठशाला में सभी बच्चों से अलग से बैठाया जाता था ।इतना ही नहीं उनके लिए पानी पीने हेतु एक अलग घड़ा भी होता था।प्यास लगने पर वह उसी घडे़ से पानी पी सकते थे। वहीं दूसरी तरफ तथाकथित उच्च जाति के बच्चों के लिए पानी पीने हेतु एक अलग घड़ा होता था ।जिसमें सभी उच्च जाति के बच्चे पानी पीते थे। डॉ भीमराव अंबेडकर को बचपन में इस तरह की सामाजिक यातनाओं को झेलना पड़ा था जिसका उनके जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ा। सतारा से हाई स्कूल की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने मुंबई के’ एलफिंस्टन कॉलेज’ में प्रवेश लिया। उन्हें ‘गायकवाड़ छात्रवृत्ति’ प्राप्त हुई जिसकी मदद से कालेज की शिक्षा प्राप्त की और बाद में अमेरिका के ‘कोलंबिया विश्वविद्यालय’ में अध्ययन किया । यह उल्लेखनीय है कि वह प्रथम भारतीय अछूत और महार थे, जो पढ़ने के लिए विदेश गए थे। अमेरिका में उन्होंने अर्थशास्त्र जैसे महत्वपूर्ण विषय से परस्नातक (एम.ए) की डिग्री हासिल की । इसके पश्चात 1916 में अंबेडकर ने विश्व प्रसिद्ध शिक्षण संस्थान ‘लंदन स्कूल आफ इकोनॉमिक्स एंड पॉलीटिकल साइंस’ में अध्ययन किया। इसके पश्चात उन्होंने ‘लंदन विश्वविद्यालय’ से पी.एच.डी की डिग्री प्राप्त की। पि.एच.डी. करते समय उनके शोध का विषय ‘द प्रॉब्लम ऑफ रुपी’ था।
अपने देश भारत आने के बाद उन्होंने वकालत का कार्य शुरु किया और साथ ही साथ अछूतों के उद्धार के लिए भी संघर्ष प्रारंभ कर दिया। अछूत उद्धार को अपने जीवन का मूलभूत लक्ष्य मानते हुए वे आजीवन इस कार्य में लगे रहे।1930 में वह अखिल भारतीय दलित वर्ग’ के अध्यक्ष बने तथा 1936 में ‘इंडिपेंडेंट लेबर पार्टी’ कि स्थापना की जिसका आगे चलकर ‘अखिल भारतीय अनुसूचित जाति संघ’ नाम रखा। स्वाधीनता के बाद भारतीय संविधान के निर्माण के समय संविधान सभा में उन्हें ‘संविधान प्रारूप समिति’ के अध्यक्ष का महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा गया और इस पद पर रहते हुए संविधान निर्माण मेंं महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसी कारण उन्हीं भारतीय संविधान का शिल्पी, पिता जैसे उपनामों से संबोधित किया जाता है ।अंबेडकर के विचारों को प्रभावित करने में रामायण और महाभारत जैसे पवित्र ग्रंथ का विशेष महत्व रहा है। महात्मा संत कबीर और महात्मा ज्योतिबाफुले उनके आदर्श थे। जिनके द्वारा किए गए समाज सुधार संबंधी कार्यों को उन्होंने अपने जीवन में आत्मसात किया ।
डॉ भीमराव अंबेडकर अपने जीवन के अंतिम समय तक सामाजिक न्याय एवम दलित उद्धार हेतु अनवरत संघर्ष करते रहे। उनको समाज में व्याप्त ऊंच- नीच एवं जात -पात के भेदभाव से घृणा थी। तत्कालीन समय में इसका कारण वह हिंदू धर्म को मानते थे। हिंदू धर्म में जो ऊँच- नीच की भावना व्याप्त थी उसी के कारण भारतीय समाज में दलित जातियों को अनगिनत यातनाओं का सामना करना पड़ा । जिसको देखकर डॉक्टर अंबेडकर का ह्रदय द्रवीभूत हुआ। अत्यंत चिंतन मनन करने के बाद जब उन्हे हिंदू धर्म में सुधार की कोई गुंजाइश नहीं दिखी तो अंततः 14 अक्टूबर 1956 को अपनी पूर्व घोषणा के अनुसार नागपुर में अपने दो लाख दलितों के साथ बौद्ध धर्म को आत्मसात कर लिया । अपने अंतर्मन की पीड़ा व्यक्त करते हुए उन्होंने एक जगह कहा है कि ‘मैं हिंदू धर्म में पैदा अवश्य हुआ लेकिन ऐसे तथाकथित आडंबर युक्त धर्म में जिसमें ऊंच-नीच ,जात- पात की भावना विद्यमान हो मरना नहीं चाहता’। डॉ भीमराव अंबेडकर द्वारा बौद्ध धर्म स्वीकार करने के पीछे दो कारण मूलतः उत्तरदाई थे पहला बौद्ध धर्म में जात -पात के लिए कोई स्थान नहीं था और दूसरा महात्मा गौतम बुद्ध भारत में भी जन्मे थे। डॉ भीमराव अंबेडकर प्रकांड विद्वान थे उनकी विद्वता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है अपने जीवन काल में उन्होंने 17 पुस्तकों को लिखा। अंतिम दिनों में उन्होंने ‘गास्पल आँव बुद्ध’ का लेखन कार्य किया। 5 दिसंबर 1956 की अर्ध रात्रि में यह महापुरुष जिस दुनिया से आया था उस दुनिया को कूच कर गया। दलित समाज में उनके द्वारा किए कार्य आज भी प्रासंगिक बने हुए हैं और भविष्य में भी प्रासंगिक बने रहेंगे। भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित नेहरु ने डॉ अंबेडकर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए लिखा है – डॉ अंबेडकर हिंदू समाज के दमनात्मक कार्यों के विरुद्ध विद्रोह के प्रतीक थे। अतः डॉ भीमराव अंबेडकर दलित समाज के लिए संघर्ष करने वाले एक अद्भुत योद्धा थे । बीसवीं शताब्दी में में भारत में दलितोत्थान हेतु उन्होंने जो कार्य किया उसका कोई अन्य उदाहरण तत्कालीन भारतीय समाज में नहीं मिलता। अंत में डॉ भीमराव जयंती पर विनम्र श्रद्धांजलि।

Like this:

Like Loading...

Post navigation

Previous: Etawah News: ब्रह्माणी देवी मंदिरों पर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में होने लगा इजाफा
Next: Sambhal News: विकास विकलांग सेवा समिति ने भीमराव अंबेडकर जयंती बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाएं

 

राशिफल

You may have missed

etawah-rojgar-mela-2026.jpg
  • Education
  • Etawah

इटावा में 18 मार्च को लगेगा बृहद रोजगार मेला, 50 से अधिक कंपनियां लेंगी भाग

जनवाद टाइम्स इटावा 11 March 2026
Jubba Sahni Shahadat Diwas Vaishali Bihar News tribute program
  • Bihar News
  • Breaking News
  • Vaishali

Bihar News: वैशाली में अमर शहीद जुब्बा सहनी का शहादत दिवस श्रद्धा पूर्वक मनाया गया

जनवाद टाइम्स 11 March 2026
Vaishali Kisan Gosthi Bihar News farmers seminar KVK Vaishali
  • Bihar News
  • Education
  • Vaishali

Bihar News: वैशाली में किसान गोष्ठी का उद्घाटन, 300 से अधिक किसान हुए शामिल

जनवाद टाइम्स 11 March 2026
20260311_193401
  • Bihar News
  • Breaking News
  • West Champaran

Betia News: कानून व्यवस्था मजबूत करने के लिए बेतिया में थानाध्यक्षों का तबादला

जनवाद टाइम्स 11 March 2026

Latest News

  • इटावा में 18 मार्च को लगेगा बृहद रोजगार मेला, 50 से अधिक कंपनियां लेंगी भाग
  • Bihar News: वैशाली में अमर शहीद जुब्बा सहनी का शहादत दिवस श्रद्धा पूर्वक मनाया गया
  • Bihar News: वैशाली में किसान गोष्ठी का उद्घाटन, 300 से अधिक किसान हुए शामिल
  • Betia News: कानून व्यवस्था मजबूत करने के लिए बेतिया में थानाध्यक्षों का तबादला
  • स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए विभाग ‘एक्शन मोड’ में, दवाओं की कमी और तकनीकी बाधाओं को दूर करने के सख्त निर्देश
  • बिहार न्यूज़: शेरे बिहार राम लखन सिंह यादव की 106वीं जयंती
  • Home
  • Advertise With Us
Copyright © All Rights Reserved I Janvad Times | MoreNews by AF themes.
%d